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Friday, September 25, 2026

विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त का यूपी दौरा रद्द, अब निर्वाचन आयोग ने बता दिया कारण

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SIR पर शुरू हुए राजनीतिक विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त का उत्तर प्रदेश का दौरा रद्द हो गया है। मेरठ-वाराणसी में CEC का जेन-जी संवाद होना था। उनका यूपी दौरा स्थगित होने पर अब चुनाव आयोग की सफाई भी सामने आ गई है।
SIR विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का यूपी दौरा रद्द हो गया है। उन्हें 25 सितंबर को मेरठ के CCSU में Gen-Z के साथ संवाद करना था। इसके बाद 28 सितंबर को वाराणसी में भी युवाओं से संवाद का कार्यक्रम था। अब इस पर चुनाव आयोग की सफाई आई है। चुनाव आयोग ने कहा है कार्यक्रमों की तारीख में बदलाव एक प्रक्रिया का हिस्सा है। पहले भी कई मौके पर कार्यक्रम स्थगित हुए हैं। इसके अलावा, इन दो विशेष सम्मेलनों को स्थगित करने का फैसला 21 सितंबर को लिया गया था।
चुनाव आयोग ने क्या कारण बताया?
मुख्य चुनाव आयुक्त का यूपी दौरा स्थगित होने पर चुनाव आयोग ने जवाब देते हुए कहा- “कार्यक्रमों की तिथियों में समायोजन एक निरंतर प्रक्रिया है, जो विभिन्न कारकों जैसे स्थलों की उपलब्धता, उच्च अधिकारियों के कार्यक्रम, प्राकृतिक कारणों आदि के कारण आवश्यक हो जाती है। ऐसे कई अवसर आए हैं जब पहले भी ELC सम्मेलनों को स्थगित किया गया/तिथियों में बदलाव किया गया है, जैसे कि हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, उत्तराखंड में। इसके अलावा, इन दो विशेष सम्मेलनों को स्थगित करने का निर्णय 21 सितंबर को लिया गया था।
विपक्ष ने CEC के खिलाफ खोला मोर्चा
दूसरी ओर विपक्षी दलों ने SIR को लेकर चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। इसके साथ ही अन्य विपक्षी दलों ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन की बात कही है। दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। बिहार में RJD कार्यकर्ता प्रदर्शन करेंगे। इसके अलावा लेफ्ट जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट करेगा।

क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत एक अखबार की रिपोर्ट के बाद हुई। अखबार ने दावा किया था कि दो निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई थी और बीते कुछ महीनों में 14 बार फैसले लिए जाने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी। वहीं, इस दावे पर जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग मत और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। चुनाव आयोग के सभी आदेश बीते एक साल में आयोग के सर्वसम्मत फैसलों का परिणाम हैं।

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