‘दायरा’ को बॉक्स ऑफिस पर ‘वाइब’ से टक्कर मिली, जिसे करीना कपूर खान के जीजा ने डायरेक्ट, लिखा और प्रोड्यूस किया था और जिसमें वे लीड रोल में हैं। वहीं धांसू स्टार कास्ट के बावजूद ‘दायरा’ की ओपनिंग औसत रही।
करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन की क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘दायरा’ शुक्रवार, 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। मेघना गुलजार के निर्देशन में बनी इस फिल्म को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली। कुछ दर्शकों ने इसे जबरदस्त और भावनात्मक रूप से बांधे रखने वाली बताया, जबकि दूसरों ने इसकी रफ्तार की आलोचना की और कहा कि कहानी को बेवजह खींचा गया है। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को ‘वाइब’ से भी टक्कर मिली, जिसे करीना के जीजा कुणाल खेमू ने लिखा, निर्देशित और प्रोड्यूस किया था और इसमें उन्होंने लीड रोल प्ले किया है। पृथ्वीराज सुकुमारन और करीना कपूर खान की फिल्म ‘दायरा’ की बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत धीमी रही। इस फिल्म की ओपनिंग करीना कपूर की पिछली फिल्म ‘द बकिंघम मर्डर्स’ से कम है।
‘दायरा’ का पहले दिन का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
बेहतरीन स्टार कास्ट और मेघना गुलजार के निर्देशन के बावजूद ‘दायरा’ की ओपनिंग निराशाजनक रही। सैकनिल्क के अनुसार, फिल्म ने भारत में अपने पहले दिन 2,283 शो में 90 लाख रुपये का नेट कलेक्शन किया। इसका भारत में ग्रॉस कलेक्शन लगभग 1.08 करोड़ रुपये रहा, जबकि कुल नेट कलेक्शन 90 लाख रुपये रहा। फिल्म ने अपने ओपनिंग डे पर कुल मिलाकर लगभग 12% ऑक्यूपेंसी दर्ज की।
करीना कपूर की सबसे कम ओपनिंग वाली फिल्म
0.90 करोड़ रुपये की ओपनिंग के साथ ‘दायरा’ की शुरुआत ‘द बकिंघम मर्डर्स’ से भी कम रही है। ‘द बकिंघम मर्डर्स’ ने 2024 में अपनी ओपनिंग वाले दिन भारत में लगभग 1.15 करोड़ रुपये कमाए थे। हंसल मेहता की डायरेक्ट की हुई उस फिल्म में भी करीना कपूर खान थीं और वह एक्ट्रेस की हालिया फिल्मों में सबसे कम ओपनिंग वाली फिल्मों में से एक थी। मौजूदा जानकारी के अनुसार ‘दायरा’ की ओपनिंग उस आंकड़े से भी कम रही है।
‘दायरा’ की कहानी क्या है?
‘दायरा’ एक युवा महिला के रेप और मर्डर की कहानी है, जिसके बाद DCP रमन कुमार (पृथ्वीराज सुकुमारन) और उनकी टीम एक पुलिस एनकाउंटर में चारों आरोपियों को मार गिराती है। इसके बाद DCP अजूनी कोहली (करीना कपूर खान) को इस एनकाउंटर की जांच का काम सौंपा जाता है। इससे एक तनावपूर्ण पुलिस प्रोसीजरल कहानी बनती है, जो न्याय, जवाबदेही और नैतिकता से जुड़े सवालों को उठाती है। फिल्म में अजूनी के कानूनी प्रक्रियाओं के सख्ती से पालन करने और रमन के इस विश्वास के बीच अंतर दिखाया गया है कि धीमी न्यायिक प्रणाली पर निर्भर रहने से पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाता।
