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Monday, August 31, 2026

सेना में तैनात जवान के मकान पर कब्जे का विवाद गहराया, किरायेदार के 7.60 लाख रुपये देने के दावे पर उठे सवाल

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नीचे खबर को अधिक प्रभावी और विस्तृत समाचार शैली में तैयार किया गया है। आरोपों को तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि संबंधित पक्षों के दावे के रूप में रखा गया है।

एसपी ने एसडीएम के कुर्की आदेश की अनुपालना कराने के दिए थे निर्देश, 24 अगस्त की तारीख बीतने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप

पत्नी और बच्चों को जान से मारने की धमकी देने का दावा, झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी का भी आरोप

शाहजहांपुर। कलान थाना क्षेत्र के रफियाबाद में मकान पर कब्जे को लेकर चल रहा विवाद लगातार गंभीर होता जा रहा है। भारतीय सेना में तैनात बताए जा रहे देवेंद्र सिंह के परिवार का आरोप है कि उनकी पत्नी के नाम खरीदे गए मकान पर किरायेदार ने कब्जा कर रखा है और मकान खाली नहीं किया जा रहा है। दूसरी ओर किरायेदार पक्ष का दावा है कि मकान खरीदने के लिए उसने 7 लाख 60 हजार रुपये दिए थे और रकम वापस किए बिना मकान खाली करने का सवाल ही नहीं है। मामले में कथित भुगतान को लेकर पुलिस जांच में कोई दस्तावेजी साक्ष्य सामने नहीं आने की बात भी रिपोर्ट में दर्ज है।

अब विवाद प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। देवेंद्र सिंह के पक्ष का आरोप है कि पुलिस अधीक्षक की ओर से एसडीएम के कुर्की आदेश की अनुपालना कराने के निर्देश दिए गए थे। कुर्की कार्रवाई के लिए 24 अगस्त 2026 की तारीख बताई जा रही थी, लेकिन आरोप है कि निर्धारित तारीख निकल जाने के बाद भी आदेश के अनुरूप कार्रवाई नहीं की गई। इसको लेकर पीड़ित पक्ष ने अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

21 फरवरी को पत्नी के नाम मकान खरीदने का दावा

देवेंद्र सिंह के अनुसार रफियाबाद में स्थित मकान का बैनामा 21 फरवरी 2026 को उनकी पत्नी सीमा देवी के नाम कराया गया था। मकान खरीदने के बाद जब उन्होंने किरायेदार से मकान खाली कर कब्जा देने को कहा तो विवाद शुरू हो गया।

देवेंद्र सिंह का आरोप है कि किरायेदार ने मकान खाली करने से इनकार कर दिया और अलग अलग दावे करते हुए कब्जा बनाए रखा। उनका कहना है कि सेना में तैनात होने के कारण वह लगातार ड्यूटी पर रहते हैं और परिवार की सुरक्षा तथा रहने की व्यवस्था को लेकर परेशान हैं।

किरायेदार ने 7 लाख 60 हजार रुपये देने का किया दावा

मामले में किरायेदार बाबू सिंह का पक्ष इससे बिल्कुल अलग है। पुलिस जांच के दौरान दिए बयान में बाबू सिंह ने दावा किया कि वह अपनी पत्नी मंजू सिंह के साथ मकान में किरायेदार के रूप में रह रहे थे। बाद में मकान मालिक सोरन सिंह ने मकान बेचने की बात कही तो उन्होंने मकान खरीदने की इच्छा जताई।

बाबू सिंह के अनुसार मकान का सौदा 12 लाख 50 हजार रुपये में तय हुआ था। उनका दावा है कि उनकी पत्नी ने सोरन सिंह को 7 लाख 60 हजार रुपये नकद दे दिए थे और शेष रकम बैनामा के समय देने की बात तय हुई थी। आरोप है कि इसके बाद सोरन सिंह ने वही मकान सीमा देवी के नाम बेच दिया।

किरायेदार का कहना है कि उसने रकम वापस मांगी, लेकिन पैसे वापस नहीं किए गए। इसी वजह से उसने मकान खाली करने से इनकार किया है। उसका दावा है कि 7 लाख 60 हजार रुपये वापस मिलने के बाद वह मकान खाली कर देगा।

पुलिस जांच में भुगतान का दस्तावेज नहीं मिला

मामले की पुलिस जांच में कथित 7 लाख 60 हजार रुपये के भुगतान को लेकर महत्वपूर्ण बात सामने आई। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार बाबू सिंह से लेनदेन से संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य मांगा गया था। बताया गया कि कथित रकम बिना किसी लिखापढ़ी के नकद दी गई थी।

पुलिस रिपोर्ट में कथित भुगतान के समर्थन में कोई दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध नहीं होने की बात दर्ज है। यही वजह है कि मकान के कब्जे और कथित रकम के लेनदेन को लेकर विवाद अभी भी बना हुआ है।

पत्नी और बच्चों को जान से मारने की धमकी का आरोप

मकान विवाद के बीच सेना में तैनात बताए जा रहे देवेंद्र सिंह ने अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि मकान खाली कराने की मांग करने के बाद से उन्हें और उनके परिवार को धमकियां दी जा रही हैं।

देवेंद्र सिंह का आरोप है कि उनकी पत्नी और बच्चों को जान से मारने की धमकी दी जा रही है। उनका कहना है कि लगातार धमकियों के कारण परिवार में भय का माहौल है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी का भी आरोप

देवेंद्र सिंह ने अपने शिकायती प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि किरायेदार पक्ष की महिला की ओर से उन्हें झूठे यौन शोषण के मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जा रही है। उनका कहना है कि मकान खाली कराने का दबाव बनाने पर उन्हें इस तरह की धमकियां दी जा रही हैं।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वहीं दूसरे पक्ष का इस संबंध में पक्ष सामने आना बाकी है। पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

एसपी के निर्देश के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप

मामले में अब प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। देवेंद्र सिंह के पक्ष का आरोप है कि पुलिस अधीक्षक की ओर से एसडीएम के कुर्की आदेश की अनुपालना कराने के निर्देश दिए गए थे। उनके अनुसार कुर्की कार्रवाई के लिए 24 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित थी, लेकिन निर्धारित तारीख बीतने के बाद भी मौके पर आदेश के अनुरूप कार्रवाई नहीं की गई।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि अधिकारियों के आदेश के बावजूद कार्रवाई लंबित रहने से किरायेदार का कब्जा बना हुआ है और परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने उच्च अधिकारियों से मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए तत्काल कार्रवाई कराने की मांग की है।

मंत्री कार्यालय से भी मुख्यमंत्री को भेजा गया था पत्र

मामले को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के कार्यालय से भी मुख्यमंत्री को पत्र भेजे जाने की बात सामने आई है। 3 अप्रैल 2026 को भेजे गए पत्र में देवेंद्र सिंह की शिकायत का उल्लेख करते हुए रफियाबाद स्थित मकान पर किरायेदारों द्वारा कथित रूप से कब्जा किए जाने की शिकायत का हवाला दिया गया था।

पत्र में संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार न्यायोचित कार्रवाई के लिए निर्देशित करने का अनुरोध किया गया था। इसके बावजूद विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ और अब कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

पुलिस ने सक्षम न्यायालय जाने की सलाह दी

पुलिस जांच में दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार किरायेदार पक्ष की ओर से 7 लाख 60 हजार रुपये दिए जाने के संबंध में कोई दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया। मामले में पुलिस ने शिकायतकर्ता को सक्षम न्यायालय के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई कराने की सलाह दी है।

मकान की बिक्री और कब्जे को लेकर आमने सामने दोनों पक्ष

फिलहाल रफियाबाद का यह मकान विवाद कई सवालों में उलझ गया है। एक तरफ मकान खरीदार पक्ष बैनामा होने के बाद मकान पर अपना अधिकार बताते हुए कब्जा दिलाने और परिवार की सुरक्षा की मांग कर रहा है। दूसरी तरफ किरायेदार पक्ष 7 लाख 60 हजार रुपये देने का दावा करते हुए रकम वापस मिलने तक मकान खाली करने से इनकार कर रहा है।

विवाद में अब कथित धमकियों और प्रशासनिक आदेश के अनुपालन का मुद्दा भी जुड़ गया है। 24 अगस्त की बताई जा रही कुर्की कार्रवाई नहीं होने के आरोप के बाद पीड़ित पक्ष ने अधिकारियों से पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित कराने की मांग की है।

अब निगाह प्रशासनिक कार्रवाई पर

मकान विवाद में दोनों पक्षों के दावों और आरोपों के बीच अब निगाह प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है। पुलिस जांच में कथित 7 लाख 60 हजार रुपये के भुगतान का दस्तावेजी प्रमाण सामने नहीं आने और मकान की बिक्री के बाद कब्जे को लेकर बने विवाद के बीच प्रशासन किस आधार पर आगे की कार्रवाई करता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। वहीं धमकी और झूठे मुकदमे में फंसाने के आरोपों की जांच भी मामले में अहम मानी जा रही है।यदि आप चाहें तो मैं इसी खबर का और ज्यादा तीखा फ्रंट पेज वाला शीर्षक और 2 लाइन का दमदार इंट्रो

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