वाराणसी। वाराणसी के चौक थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और पीड़ित परिवार की परेशानियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गाजीपुर निवासी 25 वर्षीय रेखा, जो पिछले करीब 30 वर्षों से अपने परिवार के साथ वाराणसी में प्रकाश शर्मा के मकान में रह रही हैं, ने आरोप लगाया है कि एक पुराने जमीनी विवाद के चलते उनके परिवार का पूरा सामान पिछले तीन महीने से मकान के भीतर फंसा हुआ है, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें अपना सामान तक निकालने नहीं दिया जा रहा है।
रेखा के अनुसार, 4 मई को उनका परिवार अपने पैतृक गांव गाजीपुर में पूजा कार्यक्रम में शामिल होने गया था। इसी दौरान प्रकाश शर्मा और उनके पड़ोसी रामजी गुप्ता के बीच वर्षों से चल रहे भूमि विवाद के बीच पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में प्रकाश शर्मा के मकान का अगला हिस्सा गिरा दिया गया। रेखा का आरोप है कि मकान गिराने से पहले न तो उन्हें कोई नोटिस दिया गया और न ही किसी प्रकार की सूचना दी गई। यदि समय रहते जानकारी मिल जाती तो परिवार अपना जरूरी सामान सुरक्षित बाहर निकाल सकता था।
पीड़िता का कहना है कि सूचना मिलने के बाद पूरा परिवार तत्काल वाराणसी पहुंचा, लेकिन तब तक मकान का हिस्सा ध्वस्त किया जा चुका था। इसके बाद से लगातार तीन महीने बीत जाने के बावजूद परिवार को अपना सामान निकालने की अनुमति नहीं मिल रही है। रेखा का कहना है कि वह नौकरी करने के साथ-साथ पढ़ाई भी करती हैं और उनके सभी शैक्षणिक प्रमाणपत्र, जरूरी दस्तावेज, कपड़े तथा घरेलू सामान मकान के भीतर ही फंसे हुए हैं, जिसके कारण उनका भविष्य भी प्रभावित हो रहा है।
रेखा ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार चौक थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन उनकी लिखित शिकायत तक दर्ज नहीं की गई। उन्हें हर बार केवल समझौते का आश्वासन देकर वापस भेज दिया गया। परिवार का आरोप है कि शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई करने के बजाय उन्हें लगातार टालने का प्रयास किया गया।
पीड़िता के अनुसार, जब वह अपने पिता संग्राम के साथ रामजी गुप्ता से बातचीत करने पहुंचीं और बिना सूचना मकान गिराने पर आपत्ति जताई, तब रामजी गुप्ता, उनकी पत्नी तथा उनके पिता लालजी गुप्ता ने कथित रूप से गाली-गलौज करते हुए उन्हें घर से बाहर निकाल दिया। रेखा का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपना सामान सुरक्षित निकालना था, लेकिन उन्हें अपमानित कर वहां से भगा दिया गया।
रेखा का आरोप है कि लगातार पुलिस प्रशासन से मदद मांगने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली। उनका कहना है कि पुलिस प्रशासन भी रामजी गुप्ता का सहयोग कर रहा है, जबकि पीड़ित परिवार की समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा। परिवार का कहना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई करता तो अब तक उनका सामान सुरक्षित बाहर निकल चुका होता।
पीड़िता ने बताया कि लगातार थाने के चक्कर लगाने के बाद 1 अगस्त को पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाया। इस दौरान कथित रूप से कहा गया कि केवल उनके माता-पिता सामान निकालने जा सकते हैं। रेखा का कहना है कि जब घर के भीतर वर्षों का सामान रखा है तो उनके बुजुर्ग माता-पिता अकेले उसे कैसे बाहर निकाल सकते हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे परिवार को सामान निकालने की अनुमति दी जाए, लेकिन उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी गई।
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें तत्काल सुरक्षा के बीच अपना सामान निकालने की अनुमति दिलाई जाए, मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि बिना वैधानिक प्रक्रिया के कार्रवाई हुई है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। वहीं इस मामले में दूसरे पक्ष और संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
