महाराष्ट्र के पालघर जिले के विरार क्षेत्र में लंबे समय से रह रहे एक परिवार पर आशियाना छिनने का संकट मंडराने का मामला सामने आया है। देवा हिरालाल मोहिते का कहना है कि उनका परिवार पिछले करीब 25 वर्षों से झगडे गुरुजी वस्ती, कनेर फाटा, विरार फाटा, पोस्ट मांडवी, खैरपाडा, मांडवी, विरार क्षेत्र में रह रहा है। अब उनकी झोपड़ी हटाए जाने की बात से परिवार के सामने रहने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। परिवार की चिंता है कि यदि उनका घर उजाड़ दिया गया तो वे अपने बच्चों और अन्य परिजनों को लेकर कहां जाएंगे।
देवा हिरालाल मोहिते, पुत्र हिरालाल मोहिते, ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उनका परिवार लंबे समय से इसी स्थान पर निवास कर रहा है। इतने वर्षों से यहां रहने के कारण उनका जीवन और परिवार की जरूरतें इसी ठिकाने से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में झोपड़ी हटाए जाने की आशंका ने पूरे परिवार को चिंता में डाल दिया है। उनका कहना है कि यदि उन्हें यहां से हटाया जाता है, तो प्रशासन को पहले उनके रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि परिवार को खुले आसमान के नीचे रहने के लिए मजबूर न होना पड़े।
पीड़ित परिवार का कहना है कि यह समस्या केवल एक घर तक सीमित नहीं है। क्षेत्र में अन्य परिवार भी रहते हैं, जिनके सामने इसी तरह की परेशानी खड़ी हो सकती है। इन परिवारों में छोटे बच्चे और अन्य सदस्य भी शामिल हैं। यदि रहने की उचित व्यवस्था किए बिना झोपड़ियां हटाई जाती हैं, तो प्रभावित परिवारों के सामने दैनिक जीवन चलाने, बच्चों की देखभाल करने और सुरक्षित छत उपलब्ध कराने जैसी गंभीर चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
देवा मोहिते के अनुसार, क्षेत्र के सरपंच राम राव जी गणेश का नाम भी इस मामले के संदर्भ में सामने आया है। हालांकि, झोपड़ी हटाने के संबंध में किस विभाग या प्राधिकरण की ओर से कार्रवाई की जा रही है, क्या कोई आधिकारिक नोटिस दिया गया है और वैकल्पिक आवास को लेकर प्रशासन की क्या योजना है, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित अधिकारियों का पक्ष और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।
परिवार की मांग है कि उनकी समस्या को गंभीरता से सुना जाए और उन्हें बेघर होने से बचाने के लिए समय रहते उचित कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि यदि वे वर्षों से किसी स्थान पर रह रहे हैं और अब वहां से हटाए जाने की स्थिति बन रही है, तो उनकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास अथवा वैकल्पिक आश्रय के विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए। परिवार चाहता है कि संबंधित अधिकारी मौके की स्थिति का जायजा लें, प्रभावित परिवारों की संख्या और उनकी पात्रता की जांच करें तथा नियमानुसार उचित समाधान निकालें।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि लंबे समय से रह रहे परिवारों की झोपड़ियां हटाई जाती हैं, तो उनके पुनर्वास की व्यवस्था कैसे होगी। देवा हिरालाल मोहिते ने संबंधित प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई है, ताकि समय रहते उनकी परेशानी का समाधान हो सके। परिवार को उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और बच्चों सहित सभी सदस्यों के लिए सुरक्षित आशियाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में उचित कार्रवाई की जाएगी।
