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Tuesday, October 6, 2026

पैलेट गन के मुद्दे पर संसद मार्ग थाने में दर्ज हुई FIR, कई घंटों से धरने पर बैठे थे राहुल गांधी

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दिल्ली में एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ गई है। 20 जुलाई को जंतर मंतर प्रोटेस्ट के दौरान हिंसा में घायल शख्स को लेकर राहुल गांधी थाने पहुंचे। दावा है कि साहिल लोचब को बवाल के दौरान पैलेट गन से चोट लगी थी और थाने में उसकी फरियाद नहीं सुनी जा रही थी जिस पर राहुल गांधी एक्शन मोड में थे।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पिछले कई घंटे से दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठे थे और प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी मौके पर मौजूद थे। बता दें कि राहुल गांधी जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के दौरान कथित तौर पर इस्तेमाल हुई पैलेट गन के पीड़ित साहिल लोचब को साथ लेकर डीसीपी ऑफिस आए थे। वह यह जानना चाहते थे कि इस मामले में जांच अब तक कहां तक पहुंची है और पुलिस की तरफ से क्या कार्रवाई की गई है। बता दें कि राहुल गांधी की मांग पर दिल्ली पुलिस ने आखिरकार FIR दर्ज कर ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, FIR अज्ञात के नाम पर दर्ज हुई है।
पैलेट गन पर तकरार, FIR की मांग
साहिल लोचब और उनके परिवार का आरोप है कि दिल्ली में छात्रों के संसद मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई में पैलेट गन के छर्रों से लोचब घायल हो गए थे। लेकिन दिल्ली पुलिस ने उनकी शिकायत पर FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया था। राहुल और साहिल पहले कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन गए थे, लेकिन बाद में FIR दर्ज कराने के लिए पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में DCP ऑफिस गए। इस दौरान, राहुल गांधी ने पुलिस द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी। कांग्रेस नेता ने पुलिस अधिकारियों से सीधे इस मामले पर बातचीत करने की कोशिश की, ताकि जांच की सही स्थिति सामने आ सके।

‘साहिल लोचब को 200 से ज्यादा छर्रे लगे’
मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा था, ”20 जुलाई को कनॉट प्लेस में पैलेट गन चली। साहिल लोचब को 200 से ज्यादा छर्रे लगे। AIIMS की इस रिपोर्ट में साफ लिखा है कि इनके शरीर में कितने छर्रे हैं। दिल्ली पुलिस ने कहा कि हमने छर्रे नहीं चलाए लेकिन अगर आपने नहीं चलाए तो ये छर्रे किसी ने तो चलाए होंगे। हम केवल यह कह रहे हैं कि FIR दर्ज कीजिए। अंदर से हमें बताया जा रहा है कि ऊपर से ऑर्डर है कि FIR दर्ज नहीं हो सकती है। जब तक FIR नहीं होती तब तक हम यहां से नहीं हिलेंगे। हम केवल इस परिवार के लिए न्याय मांग रहे हैं। हम पैलेट गन के पीड़ित को न्याय दिलाकर रहेंगे। यहां एक थाने से दूसरे थाने दौड़ाया जा रहा है। गृह मंत्री न्याय से इतना क्यों घबरा रहे हैं।”
दिल्ली पुलिस ने मामले पर क्या कहा?
पुलिस की ओर से इस मामले में जानकारी दी गई है कि शिकायतकर्ता की तरफ से शिकायत दी गई है जबकि राहुल गांधी शिकायतकर्ता नहीं हैं। वहीं, कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पीड़ित के साथ दिल्ली पुलिस के पास गए और आईओ का नंबर दिए जाने की मांग पर जोर दिया। लेकिन डीसीपी ने जांच अधिकारी का नंबर उपलब्ध नहीं कराया। इससे पहले राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट सीपी नुपुर प्रसाद से मुलाकात की। उन्हें चार्ज संभाले अभी दो दिन ही हुए हैं। मुलाकात के बाद राहुल गांधी बाहर आए और यहां पहुंचने के बाद अचानक बाहर ही बैठ गए।
राहुल पैरामिलिट्री के खिलाफ थाने पहुंचे- BJP
वहीं, बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा, ”राहुल गांधी देश के हर संस्थान के खिलाफ है। क्या वह पैरामिलिट्री फोर्स के खिलाफ FIR कराने पहुंचे हैं?”

क्या है पैलेट गन विवाद?
बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा NEET पेपर लीक को लेकर 20 जुलाई को आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट में घायलों के बयानों और मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि 20 जुलाई के मार्च के दौरान कई प्रदर्शनकारी पैलेट गन से घायल हुए थे।
रिपोर्ट्स में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल की बात कही जा रही है, जबकि दिल्ली पुलिस ने इस तरह के हथियार के इस्तेमाल से इनकार किया और कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उनके पास न तो पैलेट गन हैं और न ही वे इनका इस्तेमाल करते हैं। हालांकि इसके बाद भी जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

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खाड़ी देशों से 20 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी डिपोर्ट, जानें पड़ोसियों ने किए थे कैसे-कैसे कांडखाड़ी देशों से मार्च से जुलाई के बीच 20 हजार से ज्यादा पाकिस्तानियों को डिपोर्ट किया गया है। सऊदी अरब ने 15,500 और UAE ने 3,803 लोगों को वापस भेजा है। वापस भेजने के कारणों में सुरक्षा चिंताएं, वीजा उल्लंघन, अवैध प्रवेश, भीख मांगना, ड्रग अपराध और फर्जी दस्तावेज शामिल रहे। लाहौर: ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग के दौरान अब खाड़ी देशों में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों पर सुरक्षा जांच और कार्रवाई बढ़ गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, हाल के महीनों में 20 हजार से ज्यादा पाकिस्तानियों को खाड़ी देशों से डिपोर्ट किया गया है। इनमें सबसे बड़ी संख्या सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात यानी कि UAE से बाहर भेजे गए लोगों की है। बता दें कि पाकिस्तान इन दोनों ही देशों के साथ अपने अच्छे रिश्ते होने की बात कहता रहता है। हालांकि खाड़ी देशों ने इस मामले में एक तरह से पाकिस्तान को पूरी दुनिया के सामने बेइज्जत किया है। पाकिस्तानियों ने किए थे कैसे-कैसे कांड? बता दें कि यह आंकड़ा पाकिस्तान के नारकोटिक्स कंट्रोल मंत्रालय की ओर से गुरुवार को नेशनल असेंबली में पेश किया गया। मंत्रालय के मुताबिक, कुछ पाकिस्तानियों को अपने शहरों में हुए ईरानी हमलों से जुड़े वीडियो और अन्य सामग्री बनाने या सोशल मीडिया पर अपलोड करने के आरोप में भी हिरासत में लिया गया या डिपोर्ट किया गया। मंत्रालय के अनुसार, ये डिपोर्टेशन 1 मार्च से 13 जुलाई के बीच GCC के 6 देशों में हुए। GCC में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। पाकिस्तानियों को अलग-अलग कारणों से देश से बाहर भेजा गया। इनमें सुरक्षा संबंधी चिंताएं, वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी रुकना, अवैध तरीके से प्रवेश, भीख मांगना, ड्रग्स से जुड़े अपराध, शरण के आवेदन खारिज होना और फर्जी या गलत दस्तावेज शामिल हैं। अलग-अलग मामलों में कार्रवाई का शिकार आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 4,628 ऐसे लोगों को डिपोर्ट किया गया जिन्हें फरार बताया गया था। इसके अलावा 1,294 पाकिस्तानी जेल भेजे गए, 968 लोगों को ब्लैकलिस्ट किया गया और पासपोर्ट खोने से जुड़े 1,155 डिपोर्टेशन मामले सामने आए। वहीं, 689 पाकिस्तानियों को वीजा नियमों के उल्लंघन के कारण डिपोर्ट किया गया। 342 मामलों में लोगों को खाड़ी देशों में प्रवेश ही नहीं दिया गया। हालांकि, 6,000 से ज्यादा डिपोर्टेशन को मंत्रालय ने सिर्फ ‘अन्य’ श्रेणी में रखा है। इस श्रेणी के मामलों की विस्तृत जानकारी मंत्रालय ने साझा नहीं की। सऊदी अरब से सबसे ज्यादा पाकिस्तानी निकाले गए आंकड़ों में सऊदी अरब सबसे ऊपर है। वहां से 15,500 पाकिस्तानी डिपोर्ट किए गए। इसके बाद UAE से 3,803, ओमान से 1,606, बहरीन से 521, कतर से 429 और कुवैत से 97 पाकिस्तानियों को वापस भेजा गया। पाकिस्तान के संसदीय मामलों के मंत्री डॉ. तारिक फजल चौधरी ने गुरुवार को पूरक सवालों के जवाब में बताया कि ये आंकड़े केवल उन लोगों के हैं जिन्हें संबंधित देशों के अधिकारियों ने औपचारिक रूप से हिरासत में लिया और फिर पाकिस्तानी मिशनों की ओर से इमरजेंसी ट्रैवल डॉक्यूमेंट जारी किए जाने के बाद डिपोर्ट किया गया। उन्होंने साफ किया कि जो पाकिस्तानी अपनी इच्छा से वापस लौटे या वैध पासपोर्ट के साथ वापस आए, वे इन आंकड़ों में शामिल नहीं हैं। ईरानी हमलों के वीडियो बनाने पर भी हुई कार्रवाई ईरान से जुड़े संघर्ष के दौरान कुछ पाकिस्तानियों पर ईरानी हमलों से संबंधित वीडियो बनाने, पोस्ट करने या दोबारा शेयर करने के आरोप में भी कार्रवाई हुई। पाकिस्तानी अखबार Dawn की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में बहरीन ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें 5 पाकिस्तानी नागरिक थे। इन लोगों पर ईरानी हमलों के असर से जुड़े वीडियो को फिल्माने, प्रकाशित करने और दोबारा पोस्ट करने का आरोप था। संघर्ष के दौरान कुछ खाड़ी देशों में शिया समुदाय के लोगों की जांच और निगरानी भी बढ़ गई। पाकिस्तान को खाड़ी देशों ने यूं दिया करारा झटका खाड़ी देशों से इतनी बड़ी संख्या में पाकिस्तानियों के डिपोर्ट होने की खबर ने पाकिस्तान में चिंता बढ़ा दी है। खाड़ी क्षेत्र में लाखों पाकिस्तानी रहते और काम करते हैं। ये देश पाकिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वहां काम करने वाले पाकिस्तानी बड़ी मात्रा में पैसा अपने देश भेजते हैं, जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण मदद मिलती है। ऐसे में सुरक्षा जांच और डिपोर्टेशन बढ़ने से खाड़ी देशों में रहने वाले पाकिस्तानी प्रवासी कामगारों और दूसरे नागरिकों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। (PTI से इनपुट्स के साथ)
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