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Tuesday, September 15, 2026

गणेश जी की तस्वीर लगा बेच रहा था बिरयानी, गिरफ्तार कर भेजा गया जेल

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भगवान गणेश की तस्वीर वाले बैनर लगाकर बिरयानी बेचने का मामला सामने आया है। स्थानीय बिल्डर की शिकायत के बाद पुलिस ने दुकानदार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
तिरुनेलवेली में भगवान गणेश की तस्वीर लगाकर बिरयानी बेचना एक दुकानदार को भारी पड़ गया। स्थानीय लोगों ने धार्मिक भावनाएं आहत होने की शिकायत दर्ज करवाई और इसके खिलाफ विरोध किया। इसके बाद पुलिस ने बैनर को तुरंत हटाया और दुकानदार जयंत पर केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया।

स्थानीय बिल्डर ने दर्ज कराई शिकायत
तिरुनेलवेली के V.M. चत्रम इलाके में ये घटना हुई, दुकान पर भगवान गणेश की तस्वीर वाला एक बैनर लगाया गया था, जिसके बाद धार्मिक भावनाएं आहत होने की शिकायत पुलिस को मिली। शहर के एक स्थानीय बिल्डर सेल्वराज ने ‘डिंडिगुल कल्याणा बिरयानी’ दुकान के सामने लगा एक बैनर देखा, यह देखकर सेल्वराज हैरान रह गए और उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप था कि बैनर से हिंदुओं के पूजनीय देवता भगवान गणेश का अपमान हुआ है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
दुकानदार को किया गया गिरफ्तार
उन्होंने सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई और अधिकारियों से उचित कार्रवाई करने की मांग की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और बैनर लगाने के पीछे की वजह और मकसद जैसे कई पहलुओं की पड़ताल की। इसके बाद, बिरयानी दुकान के मालिक जयंत (30) को गिरफ्तार कर उसे जेल भेज दिया।

चेहल्लुम के मौके पर बिरयानी की लूट
बीते महीने उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक खबर आई थी, यहां के बिल्हौर थाना क्षेत्र के मकनपुर दरगाह शरीफ में चेहल्लुम के दौरान ताजिए ठंडे किए जाने के बीच बिरयानी बांटने को लेकर जमकर छीना-झपटी और लूटपाट हुई। बिरयानी लेने के लिए युवकों की भारी भीड़ जुट गई, जिसके चलते वितरण कर रहे ताजिए कार्यकर्ता मौके से हट गए और भीड़ ने स्टैंड से बिरयानी की पूरी डेग जमीन पर गिरा दी। इसके बाद लोग बिरयानी लेने के लिए टूट पड़े। इस दौरान कई लोगों के कपड़े गंदे हो गए, जबकि छीना-झपटी में कुछ युवकों को नाखून लगने से खरोंचें आईं। मौके पर मौजूद लोगों ने घटना का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। बता दें कि चेहल्लुम को अरबी में ‘अरबाईन’ कहा जात है, जिसका फारसी में अर्थ ‘चालीसवां’ होता है। यह मुहर्रम के महीने में करबाला की लड़ाई में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत के ठीक 40 दिन बाद, यानी सफर महीने की 20 तारीख को आता है।

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