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Friday, October 2, 2026

सिहोरा में मकान-जमीन विवाद ने पकड़ा तूल, उमाबाई गुप्ता का आरोप- बेटी शिवानी को फंसाकर घर पर कब्जे की कोशिश

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जबलपुर/सिहोरा। सिहोरा क्षेत्र में मकान और जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब गंभीर आरोपों तक पहुंच गया है। विनोबा वार्ड नंबर-06, सिहोरा निवासी उमाबाई गुप्ता पत्नी स्वर्गीय मोहन गुप्ता और उनकी भांजी शिवानी महेश गुप्ता ने मामले में निष्पक्ष जांच और समय रहते न्याय की मांग की है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि पिछले करीब दो से तीन वर्षों से विवाद लगातार चल रहा है, लेकिन अब तक उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है। उमाबाई गुप्ता का आरोप है कि उनके ही परिचित रिश्तेदारों की ओर से मकान पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है और विरोध करने पर धमकियां दी जाती हैं।

पीड़ित पक्ष के अनुसार, उमाबाई गुप्ता के पति स्वर्गीय मोहन गुप्ता का निधन 31 अगस्त 2017 को हो चुका है। उमाबाई का कहना है कि उनकी कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने अपनी सगी बहन की बेटी शिवानी को करीब 20 वर्षों तक अपने पास रखकर उसका पालन-पोषण किया। शिवानी की शादी हुई, बाद में उसका तलाक हो गया और उसका करीब 11 वर्ष का एक बच्चा भी है। उमाबाई का कहना है कि इतने लंबे समय से साथ रहने वाली शिवानी को वह अपनी बेटी की तरह मानती हैं और वर्तमान विवाद के बीच उसे अकेला नहीं छोड़ सकतीं।

शिवानी महेश गुप्ता की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, उनके मकान पर धोखाधड़ी के माध्यम से जबरन कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। पीड़ित पक्ष ने सोनू उर्फ अमित समेत कुछ लोगों के नाम मामले से जुड़े होने की बात कही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि जब उन्होंने मकान पर कब्जे का विरोध किया तो उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ा और शिवानी के खिलाफ कथित तौर पर दो बार गिरफ्तारी वारंट की कार्रवाई भी कराई गई। परिवार को आशंका है कि शिवानी को किसी मामले में जेल भिजवाकर मकान पर कब्जे का रास्ता बनाया जा सकता है।

उमाबाई गुप्ता ने एक बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शिवानी को कथित रूप से यह कहकर दबाव में लेने की कोशिश की जाती है कि वह अपनी मौसी को जहर दे दे, जिससे उनकी मौत हो जाए और इसके बाद शिवानी को जेल भिजवाया जा सके। यह आरोप पीड़ित पक्ष की ओर से लगाया गया है और इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। उमाबाई का कहना है कि शिवानी थोड़ी पढ़ी-लिखी है और अपने अधिकारों को लेकर आवाज उठाती है, इसी वजह से उसे कथित तौर पर निशाना बनाया जा रहा है।

जमीन के विवाद को लेकर भी पीड़ित पक्ष ने दस्तावेजी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, सुशीला बाई से संबंधित जमीन के नामांतरण और स्वामित्व को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनका दावा है कि जमीन मोहन के नाम होनी थी, लेकिन समान नामों के कारण दस्तावेजी प्रक्रिया में कथित तौर पर गड़बड़ी हुई और जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज हो गई। पीड़ित पक्ष ने बसंत बिल्लया निवासी सिहोरा और अन्य संबंधित लोगों का भी मामले में जिक्र किया है। वर्ष 2023 के आसपास जमीन से संबंधित दस्तावेजी बदलाव होने की बात भी सामने आई है। हालांकि जमीन के वास्तविक स्वामित्व और दस्तावेजों की स्थिति का अंतिम निर्धारण राजस्व अभिलेख और सक्षम न्यायिक अथवा प्रशासनिक जांच के आधार पर ही हो सकता है।

उमाबाई गुप्ता ने बैंक से जुड़े पुराने लेनदेन का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि महाराष्ट्र बैंक से लिए गए ऋण के संबंध में उनके परिवार की एफडी का इस्तेमाल किया गया था। पीड़ित पक्ष के अनुसार, वर्ष 2018-19 के आसपास हिसाब-किताब किया गया था और करीब साढ़े चार लाख रुपये की राशि से संबंधित मामला था। उमाबाई का कहना है कि कई वर्ष बीत जाने के कारण अब एफडी की राशि बढ़कर करीब 10 लाख रुपये के आसपास होने का दावा किया जा रहा है। इस वित्तीय विवाद से जुड़े दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की भी जांच आवश्यक बताई जा रही है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि मकान, जमीन, बैंक लेनदेन और पारिवारिक विवाद आपस में जुड़ गए हैं, जिसके कारण मामला लगातार उलझता जा रहा है। उमाबाई गुप्ता का कहना है कि उनके पति की मृत्यु के बाद वह पहले से ही कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजार रही हैं। ऐसे में मकान पर कब्जे की कथित कोशिश और परिवार के सदस्यों के बीच बढ़ते विवाद ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।

उमाबाई गुप्ता और शिवानी महेश गुप्ता ने पुलिस और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जमीन एवं मकान से जुड़े दस्तावेजों की जांच करने, बैंक लेनदेन का सत्यापन कराने तथा धमकी और कथित कब्जे के प्रयासों की जांच करने की मांग की है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यदि उनके आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए और यदि आरोपों में तथ्य नहीं हैं तो वास्तविक स्थिति भी जांच के माध्यम से स्पष्ट की जाए।

पीड़ित परिवार की मांग है कि मामले की सुनवाई निष्पक्ष तरीके से हो और किसी भी पक्ष के प्रभाव में आए बिना दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, राजस्व अभिलेख तथा पूर्व में हुई कानूनी कार्रवाई की जांच की जाए। उनका कहना है कि लंबे समय से चल रहे विवाद का समय रहते समाधान नहीं हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। पीड़ित उमाबाई गुप्ता और शिवानी महेश गुप्ता ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर उन्हें न्याय दिलाने की गुहार लगाई है।

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