आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट से 5 बार के विधायक और समाजवादी पार्टी के नेता आलमबदी आजमी का लखनऊ के अस्पताल में निधन हो गया है। आलमबदी आजमी 1996 में पहली विधायक बने थे। इस आर्टिकल में उनकी निजी जिंदगी और राजनीतिक करियर के बारे में जानिए।
समाजवादी पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से बुधवार की रात एक दुखद आई। दरअसल, निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र से 5 बार विधायक रहे वरिष्ठ समाजवादी नेता आलमबदी आजमी का लखनऊ के एक अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। आलमबदी आजमी के निधन की खबर मिलते पर उनके समर्थकों, शुभचिंतकों और तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं ने इसे आजमगढ़ के लिए क्षति बताया है।
अखिलेश यादव ने भी जताया शोक
आलमबदी आजमी के निधन पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी शोक जताया है। अखिलेश यादव ने X पर पोस्ट किया, ‘समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा से लोकप्रिय विधायक जनाब आलम बदी साहब का इंतकाल, अत्यंत दुखद! दिवंगत आत्मा को शांति दें भगवान। शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहने का संबल प्राप्त हो। भावभीनी श्रद्धांजलि!
1996 में पहली बार बने थे विधायक
बता दें कि आलमबदी आजमी का जन्म वर्ष 1936 में हुआ था। वे मूल रूप से बिंदवल, जयराजपुर (बिलरियागंज), आजमगढ़ के निवासी थे, जबकि शहर के माताबगंज स्थित अपने आवास पर परिवार के साथ रहते थे। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद आलमबदी आजमी ने गोरखपुर में नौकरी भी की, लेकिन महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस के विचारों से प्रेरित होकर समाजसेवा और राजनीति का रास्ता चुना था।
जनता ने 5 बार चुनकर भेजा विधानसभा
आलमबदी आजमी, साल 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर पहली बार निजामाबाद विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद आलमबदी आजमी कुल 5 बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने में सफल रहे और जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।
जब ठुकरा दिया था मंत्री का पद
साल 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर आलमबदी आजमी को मंत्री बनाए जाने का प्रस्ताव मिला, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मंत्री पद स्वीकार नहीं किया कि वे अपने क्षेत्र की जनता के बीच रहकर उनकी सेवा करना चाहते हैं। उनकी इसी सोच ने उन्हें आम नेताओं से अलग पहचान दिलाई।
सादगी थी उनकी सबसे बड़ी पहचान
आलमबदी आजमी का जीवन पूरी तरह सादगी से भरा था। साधारण कुर्ता-पायजामा, पैरों में चप्पल, कान में छोटी सुनने की मशीन और हाथ में साधारण कीपैड मोबाइल उनकी पहचान बन चुका था। वे बिना किसी तामझाम के लोगों के बीच पहुंचते थे और कई बार पैदल ही क्षेत्र का भ्रमण करते दिखाई देते थे। उनके घर आने वाले मेहमानों को छोटे कप में बिना दूध की चाय परोसी जाती थी। घर में कोई नौकर नहीं था। मेहमानों की सेवा उनके बेटे और पोते स्वयं करते थे। वे टीन शेड के नीचे बैठकर लोगों की समस्याएं सुनते थे और सादगीपूर्ण जीवन को ही अपना आदर्श मानते थे।
ईमानदार राजनीति के लिए थे मशहूर
आलमबदी आजमी अपनी ईमानदारी और साफ-सुथरी राजनीति के लिए पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चित रहे। विकास कार्यों में पारदर्शिता और जनता के प्रति समर्पण उनकी सबसे बड़ी पूंजी थी। उन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया और जीवनभर उसी सिद्धांत पर चलते रहे। आलमबदी आजमी के निधन पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रवासियों ने गहरा शोक जताया है।
