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Wednesday, July 8, 2026

‘गरीबी का मजाक उड़ाना है भेदभाव’, NCERT का संदेश, स्कूलों में मिलेगी नई सीख

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NCERT ने कक्षा 8वीं की सोशल साइंस की किताब में बड़ा संदेश दिया है। NCERT ने कहा है कि गरीबी का मजाक उड़ाना भेदभाव है। ये सीख अब स्कूलों में बच्चों को दी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जारी की गई NCERT की कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान (भाग-2) की किताब में एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब भेदभाव (Discrimination) के कारणों में आर्थिक स्थिति (Economic Background) को भी शामिल किया गया है। नई किताब ‘Exploring Society: India and Beyond’ के ‘नागरिकता: अधिकार और कर्तव्य’ अध्याय में लिखा है कि किसी व्यक्ति या समूह के साथ उसकी जाति, धर्म, नस्ल, जातीय पहचान, दिव्यांगता, शारीरिक बनावट, लिंग, यौन पहचान या आर्थिक स्थिति के आधार पर गलत व्यवहार करना भेदभाव है।

अनैतिक और कानून के खिलाफ भी
NCERT की किताब में यह भी कहा गया है कि ऐसा करना केवल अनैतिक ही नहीं, बल्कि कानून के खिलाफ भी है। किताब में यह भी समझाया गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी कई बार भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है, इसी वजह से आर्थिक स्थिति को भी भेदभाव का एक अहम कारण माना गया है।

क्यों है यह बदलाव चर्चा में?
हाल ही में जारी UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 में भेदभाव की परिभाषा में धर्म, जाति, नस्ल, लिंग, जन्मस्थान और दिव्यांगता जैसे आधार शामिल किए गए हैं, लेकिन आर्थिक स्थिति का अलग से उल्लेख नहीं किया गया है। इसी बात को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लोगों के साथ होने वाले भेदभाव को भी स्पष्ट रूप से मान्यता मिलनी चाहिए। ऐसे में NCERT की नई किताब में आर्थिक स्थिति को भेदभाव का आधार बताने को एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

कक्षा-9 के सिलेबस में SIR और EC शामिल
आपको बता दें कि इससे पहले NCERT ने कक्षा-9 के सिलेबस में SIR और चुनाव आयोग को भी ऐड कर दिया था। NCERT 9वीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान की पुस्तकों में नया अध्याय जोड़ा है और इसमें मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग के बारे में पढ़ाया जाएगा। NCERT ने कितान में भारत की चुनावी प्रक्रिया को ‘बेमिसाल’ बताया है और कहा है कि आयोग देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने, वोटर लिस्ट तैयार करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने का काम करता है।

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