बदायूं/बिसौली। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के बिसौली क्षेत्र के खेड़ा दास गांव की रहने वाली 20 वर्षीय ममता की मौत के मामले में उनके भाई ज्ञान सिंह ने कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था और रिकॉर्ड प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। भाई का कहना है कि उनकी बहन पिछले तीन-चार वर्षों से एक कंपनी में काम कर रही थी। 9 अक्टूबर 2026 को हुई इस घटना के बाद परिवार न्याय और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनकी शिकायत पर उचित सुनवाई नहीं हो रही है, जिससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद को लेकर चिंता बनी हुई है।
ज्ञान सिंह के अनुसार, उनकी बहन ममता माइक्रो पॉलिटिक प्लॉट नंबर 112 स्थित कंपनी में नौकरी करती थी। वह पिछले तीन से चार वर्षों से वहां काम कर रही थी। परिवार के मुताबिक, ममता सीमाएं नगर में किराए के मकान में रहती थी। 9 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 8 बजे से 8:20 बजे के बीच की गतिविधियों को लेकर परिवार ने सवाल उठाए हैं। ज्ञान सिंह का दावा है कि सीसीटीवी कैमरे में सुबह करीब 8:20 बजे ममता की कंपनी के अंदर प्रवेश करते हुए दिखाई देने की जानकारी मिली है, लेकिन उस दिन गार्ड के रिकॉर्ड में उसकी एंट्री दर्ज नहीं होने की बात सामने आई है।
परिवार का कहना है कि यदि सीसीटीवी फुटेज में ममता के कंपनी परिसर में प्रवेश करने की पुष्टि होती है, तो उस दिन के प्रवेश रजिस्टर में उसका नाम दर्ज नहीं होने के कारणों की जांच की जानी चाहिए। ज्ञान सिंह ने कंपनी के सुरक्षा इंतजामों और कर्मचारियों के आने-जाने से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनकी बहन लंबे समय से कंपनी में काम कर रही थी, इसलिए उसके प्रवेश से संबंधित जानकारी और उस दिन की परिस्थितियों को स्पष्ट करना जरूरी है।
ज्ञान सिंह के मुताबिक, ममता अपने किराए के मकान पर पहुंचने के बाद फांसी पर लटकी मिली। इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। हालांकि, घटना के पीछे की वास्तविक वजह क्या थी, यह जांच का विषय है। केवल सीसीटीवी फुटेज और गार्ड के रिकॉर्ड में कथित अंतर के आधार पर कंपनी की लापरवाही या किसी अन्य व्यक्ति की जिम्मेदारी को अंतिम रूप से तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए पुलिस जांच, संबंधित रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष पड़ताल जरूरी है।
मृतका के भाई ज्ञान सिंह का कहना है कि परिवार इस मामले में अपनी बात संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उन्हें अब तक उचित सुनवाई नहीं मिलने की शिकायत है। परिवार चाहता है कि ममता की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि घटना वाले दिन वह कंपनी में कब पहुंची, उसकी उपस्थिति का रिकॉर्ड क्यों नहीं मिला और उसके बाद किन परिस्थितियों में उसकी मौत हुई।
परिवार की मांग है कि कंपनी परिसर के सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश रजिस्टर, गार्ड की ड्यूटी से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य प्रासंगिक साक्ष्यों की जांच कराई जाए। साथ ही, यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। परिवार को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच से घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने आएंगी और उन्हें न्याय मिल सकेगा।
इस मामले में कंपनी प्रबंधन और संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए। फिलहाल, परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों और सीसीटीवी तथा गार्ड के रिकॉर्ड से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ममता की मौत के कारणों और घटना की पूरी परिस्थितियों का पता लगाने के लिए निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है।
