प्रतापगढ़ जिले के आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र से मारपीट और जानलेवा हमले का एक गंभीर मामला सामने आया है। गांव मझगवां निवासी रामलाल ने जिला धिकारी और पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि पुरानी आबादी विवाद और आपसी रंजिश के चलते विपक्षी पक्ष ने उन पर और उनके परिवार पर सुनियोजित हमला किया।
पीड़ित के अनुसार घटना 28 अप्रैल 2026 की सुबह करीब 7 बजे की है, जब राजेन्द्र, सिकन्दर, अंकित, अमित, देवराज, वंशराज सहित कई लोग एकजुट होकर लाठी डंडा, फस्सा और कुल्हाड़ी लेकर उनके घर पहुंच गए। आरोप है कि हमलावरों ने गाली गलौज करते हुए परिवार पर हमला बोल दिया और बेरहमी से मारपीट की।
पीड़ित का कहना है कि शोर सुनकर उनकी पत्नी शीला देवी और बेटे आशीष व आकाश बीच बचाव के लिए पहुंचे, लेकिन हमलावरों ने उन्हें भी नहीं छोड़ा और बुरी तरह पीटा। हमले में परिवार के कई सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण कुछ लोग मौके पर ही बेहोश हो गए।

घायल पक्ष का आरोप है कि हमलावर उनका मोबाइल फोन भी छीन ले गए। घटना के बाद गांव के लोग मौके पर पहुंचे और बीच बचाव कर किसी तरह उनकी जान बचाई।
पीड़ित परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने बिना उनकी तहरीर लिए अपनी मर्जी से दोनों पक्षों की रिपोर्ट दर्ज कर ली, जबकि घायल पक्ष के बयान तक नहीं लिए गए। वर्तमान में पीड़ित परिवार जिला अस्पताल में भर्ती है और गंभीर हालत में उपचाराधीन है।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा हुआ है। परिवार का कहना है कि आरोपी लगातार धमकी दे रहे हैं और खुलेआम कह रहे हैं कि पुलिस उनके प्रभाव में है और उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
पीड़ित रामलाल ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और मुख्यमंत्री को प्रेषित शिकायत में मांग की है कि दर्ज मुकदमे में संशोधन कर गंभीर धाराएं जोड़ी जाएं, आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी हो और छीना गया मोबाइल वापस दिलाया जाए।
रामलाल जी का मेडिकल नहीं करवा रहे हैं पुलिस वाले रोक रहे हैं वहां अपना मेडिकल कराकर साबित करना चाहते हैं कि उनको कितनी चोट आई है
अब इस मामले में प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला कानून व्यवस्था और पुलिस कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
