शिवसेना यूबीटी के लिए एक राहत की खबर है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट उसकी याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। ये याचिका शिवसेना यूबीटी के बागी सांसदों के दूसरे पाले में जाने को लेकर है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट बुधवार को शिवसेना (यूटीबी) द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पार्टी के छह सांसदों के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को अनुमति देने के निर्णय को चुनौती दी गई है।
न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और अन्य प्रतिवादियों से जवाब मांगा है। पीठ ने कहा कि नोटिस जारी किया जाए तथा मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध कर दी।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ने 18 जुलाई को शिवसेना (यूटीबी) के छह सांसदों के शिंदे नीत शिवसेना में विलय को अनुमति दी थी। बागी छह सांसदों के विलय के बाद लोकसभा में शिवसेना के सदस्यों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।
शिवसेना (यूटीबी) के टिकट पर कुल नौ सांसद निर्वाचित हुए थे, जिनमें से छह शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। शिवसेना (यूटीबी) ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष दलील दी थी कि उसके बागी सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए क्योंकि यह दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में आता है।
गौरतलब है कि हाल ही में ये जानकारी सामने आई थी कि उद्धव गुट के 6 बागी सांसदों को शिंदे गुट में जाने की मान्यता मिल गई है और खुद लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने ये मान्यता दी है। ऐसे में शिंदे गुट पहले से मजबूत हो गया, वहीं उद्धव गुट कमजोर पड़ गया।
कौन हैं उद्धव गुट से बागी होने वाले छह सांसद-
परभणी से सांसद संजय जाधव
मुंबई उत्तर-पूर्व से सांसद संजय दीना पाटिल
उस्मानाबाद/धाराशिव से ओमराज निंबालकर
हिंगोली से नागेश पाटिल अष्टीकर
यवतमाल-वाशिम से संजय उत्तमराव देशमुख
शिर्डी से भाऊ साहेब वाकचौरे
बता दें कि जब उद्धव गुट के बागी सांसद शिंदे गुट में आए थे तो डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे का बयान भी सामने आया था। शिंदे ने कहा था, “जो लोग हमारे साथ जुड़ रहे हैं, वे भरोसे की वजह से ऐसा कर रहे हैं। चाहे सांसद हों या वे कई अन्य लोग जो पिछले 3-4 सालों में हमारे साथ जुड़े हैं, उन्हें शिवसेना, मुझ पर और हमारी टीम पर पूरा भरोसा है। वे जानते हैं कि हम अपने वादे निभाते हैं और अपनी बात पर कायम रहते हैं। हम पार्टियां तोड़ने या फूट डालने का काम नहीं करते। हम जोड़ने वाले लोग हैं। हम यहां उनके चुनाव क्षेत्रों के लोगों को न्याय दिलाने और जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए आए हैं। हम निश्चित रूप से उन्हें पूरा समर्थन देंगे।
बता दें कि जब सांसदों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ा था तो वह बौखला गए थे और उन्होंने देवेंद्र फडणवीस से लेकर शिंदे तक पर हम
