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Tuesday, August 25, 2026

दो हफ़्ते में सरेंडर करें’, रेप केस में सज़ा पाए तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

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दुष्कर्म के मामले में सजा पाए तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ‘तहलका’ के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल की उस अर्ज़ी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में अपनी सज़ा और 10 साल की जेल की सज़ा के खिलाफ अपील पर सुनवाई होने तक सरेंडर करने से छूट मांगी थी। कोर्ट ने उन्हें दो हफ़्ते के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया। जस्टिस आलोक अराधे ने तेजपाल की सरेंडर से छूट की अर्ज़ी खारिज कर दी और उन्हें सरेंडर सर्टिफिकेट जमा करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि अगर सर्टिफिकेट 22 सितंबर या उससे पहले जमा किया जाता है, तो उनकी अपील उसी तारीख को लिस्ट की जाए।
कोर्ट ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तहलका पत्रिका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को दो हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सरेंडर करने के बाद ही उनकी रेप के मामले में दाखिल अपील पर आगे सुनवाई की जाएगी। तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें 2013 के रेप मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।

सरेंडर का सर्टिफिकेट देना होगा
सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल को दो हफ्ते के अंदर सरेंडर करने और इसका सर्टिफिकेट कोर्ट में जमा करने को कहा है। इसके बाद ही कोर्ट उनकी अपील पर मामले के पूरे तथ्यों के आधार पर सुनवाई करेगा। कोर्ट ने आदेश दिया कि तेजपाल दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करेंगे और इसका सर्टिफिकेट दाखिल करेंगे। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि 22 सितंबर या उससे पहले सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल कर दिया जाता है तो रजिस्ट्री मामले को 22 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करे।

तेजपाल के वकीलों ने क्या दी दलीलें
तेजपाल की ओर से पेश सीनियर वकील कपिल सिब्बल और अमन लेखी ने दलील दी कि क्रिमिनल अपील लिस्ट होने से पहले आरोपी का सरेंडर करना कोई कानूनी ज़रूरत नहीं है। सिब्बल ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 6 अगस्त के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें तेजपाल को सरेंडर करने के लिए चार हफ़्ते का समय दिया गया था। कोर्ट ने माना था कि मामला 13 साल पुराना है और वह अब एक सीनियर सिटिजन हैं जिनकी समाज में मज़बूत जड़ें हैं।

सिब्बल ने कहा, “ऐसी कोई कानूनी शर्त नहीं है कि अपील लिस्ट होने से पहले उन्हें सरेंडर करना ही होगा।” उन्होंने कहा कि अपील पर सुनवाई शुरू होने से पहले तेजपाल को कुछ दिनों के लिए जेल भेजने का कोई मकसद नहीं है। उन्होंने कहा, “उन्हें पांच दिन के लिए जेल भेजने का कोई मतलब नहीं है।”

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