गया/पटना। बिहार में एक सरकारी महिला पुलिसकर्मी द्वारा अपने ही पति और ससुराल पक्ष पर लगाए गए गंभीर आरोपों ने पारिवारिक विवाद को कानून-व्यवस्था और बाल संरक्षण के बड़े मुद्दे में बदल दिया है। बिहार उत्पाद पुलिस में कार्यरत सुनीता कुमारी ने अपने नाबालिग पुत्र की बरामदगी, उसकी सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित कराने के लिए उच्च पुलिस अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि वैवाहिक विवाद के दौरान उनके पति उनके एक नाबालिग पुत्र को जबरन अपने साथ ले गए और लंबे समय से बच्चे की वास्तविक स्थिति, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सुरक्षा संबंधी जानकारी उनसे छिपाई जा रही है।
सुनीता कुमारी ने क्षेत्रीय पुलिस उपमहानिरीक्षक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस बल एवं स्पेशल महिला सेल सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को दिए गए आवेदन में कहा है कि एक मां होने के नाते उन्हें अपने पुत्र से मिलने, उसकी कुशलक्षेम जानने और उसके भविष्य की जानकारी प्राप्त करने का प्राकृतिक, नैतिक और कानूनी अधिकार है। उनका कहना है कि संबंधित थाना और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को पूर्व में आवेदन दिए जाने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे उनकी चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
महिला पुलिसकर्मी ने अपने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि उनके पति द्वारा विभाग में प्रस्तुत शिकायत तथ्यों को छिपाकर केवल उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और वैवाहिक एवं संपत्ति विवाद में दबाव बनाने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने दावा किया कि विवाह के बाद से ही अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर उनके साथ मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की जाती रही। विरोध करने पर मारपीट, अपमान और अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ा।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पति की सरकारी नौकरी लगने के बाद उनके व्यवहार में और अधिक बदलाव आया तथा आर्थिक लाभ और संपत्ति पर कब्जा करने की मंशा से लगातार दबाव बनाया जाने लगा। सुनीता कुमारी का आरोप है कि उनके वेतन से निर्मित उनके नाम के मकान को अपने कब्जे में लेने और दूसरे के नाम हस्तांतरित कराने के लिए उन पर लगातार दबाव बनाया गया। विरोध करने पर उन्हें प्रताड़ित किया गया।
टनकुप्पा थाना में दर्ज कराई गई शिकायत में महिला ने आरोप लगाया है कि 7 मई 2026 को उनके पति, ससुर, सास और परिवार के अन्य सदस्यों ने गाली-गलौज करते हुए उनके साथ मारपीट की और घर से बाहर निकाल दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके 8 वर्षीय पुत्र अंकुश राज के सिर पर लोहे की रॉड से हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रेफर करना पड़ा।
शिकायत में महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि परिवार के कुछ सदस्यों ने उनके साथ छेड़छाड़ का प्रयास किया, उन्हें जान से मारने की साजिश रची गई तथा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर पागल घोषित करने की कोशिश की गई। इतना ही नहीं, उन्हें कथित रूप से जहरीला पदार्थ देने की धमकी भी दी गई। महिला का कहना है कि उनके तीनों बच्चों को अलग-अलग कर दिया गया है, जिससे पूरा परिवार बिखर गया है।
दस्तावेजों के अनुसार टनकुप्पा थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू की गई है। वहीं, महिला ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि उनके नाबालिग पुत्र की तत्काल बरामदगी कर उसकी वर्तमान स्थिति, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा का सत्यापन कराया जाए। साथ ही यदि किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर बच्चे को मां से दूर रखकर उसकी स्थिति छिपाई जा रही है तो उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
महिला ने प्रशासन से यह भी अनुरोध किया है कि मामले की उच्च स्तरीय निगरानी कराई जाए ताकि बच्चे के हितों की रक्षा हो सके और भविष्य में किसी अप्रिय घटना की आशंका को रोका जा सके। अब यह मामला केवल पति-पत्नी के विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि एक नाबालिग बच्चे के अधिकार, महिला सुरक्षा, दहेज प्रताड़ना और कानून व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। पूरे मामले में अब पीड़िता को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई का इंतजार है।
