33.1 C
Munich
Monday, August 10, 2026

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला तो परमाणु समझौते से पीछे हट सकते हैं ट्रंप, लेकिन ईरान ने रखी कड़ी शर्तें

Must read

ट्रंप ईरान के साथ संघर्ष खत्म करने के लिए परमाणु डील के बजाय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को दोबारा खोलने को प्राथमिकता दे सकते हैं। वहीं, ईरान ने होर्मुज़ को फिर से खोलने के लिए कई शर्तें गिनाई हैं।
ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब परमाणु समझौते के बजाय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को दोबारा खोलने को प्राथमिकता दे सकते हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप अपने करीबी अधिकारियों से यह संकेत दे चुके हैं कि अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में समुद्री यातायात पूरी तरह बहाल कर देता है, तो अमेरिका परमाणु समझौते के बिना भी संघर्ष को समाप्त करने का रास्ता तलाश सकता है।
हालांकि, ईरान ने होर्मुज़ को फिर से खोलने के लिए ऐसी शर्तें रख दी हैं, जिनसे किसी समझौते तक पहुंचना मुश्किल नजर आ रहा है। तेहरान ने अमेरिका से अरबों डॉलर के भुगतान, नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करने, अमेरिकी सैनिकों को क्षेत्र से वापस बुलाने और अन्य रियायतों की मांग की है।

होर्मुज के रास्ते ट्रंप की ‘एग्जिट प्लान’
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के कारण यहां समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है। इसके चलते वैश्विक तेल बाजार में भी अस्थिरता बढ़ी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप हाल के हफ्तों में कई बार दावा कर चुके हैं कि होर्मुज़ पूरी तरह खुला है, लेकिन ईरान की स्थिति इससे अलग रही है। तेहरान ने अमेरिकी युद्धपोतों और उसके सहयोगियों के जहाजों के आवागमन पर आपत्ति जताई है। ईरान ने व्यावसायिक जहाजों से इस मार्ग के इस्तेमाल के बदले शुल्क लेने की बात भी कही है, जिसे अमेरिका ने खारिज कर दिया है।

ईरान ने रखी लंबी मांगों की सूची
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर ज़ोलघद्र ने होर्मुज़ को फिर से खोलने के लिए कई शर्तें गिनाईं। इनमें अमेरिका द्वारा युद्ध स्थायी रूप से समाप्त करना, नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, अमेरिकी सैनिकों की क्षेत्र से वापसी, ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना और ईरान की जब्त संपत्तियों को जारी करना शामिल है।

इसके अलावा, ईरान ने युद्ध क्षतिपूर्ति की मांग भी की है। तेहरान चाहता है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ धमकियां और बयानबाजी बंद करे और क्षेत्र में ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई भी रोकी जाए।

ट्रंप के लिए घरेलू राजनीति भी बड़ी चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप पर संघर्ष को जल्द खत्म करने का घरेलू दबाव भी बढ़ रहा है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में तीन महीने से भी कम समय बचा है और युद्ध शुरू होने के बाद पेट्रोल की कीमतें पहले के मुकाबले काफी ऊंची बनी हुई हैं। ऐसे में ट्रंप के सामने चुनौती है कि वह संघर्ष को इस तरह खत्म करें कि अमेरिका में इसे अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर सकें। होर्मुज़ में जहाजों की आवाजाही बहाल होना उनके लिए ऐसा राजनीतिक आधार बन सकता है।

परमाणु मुद्दा क्यों पीछे जा सकता है?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का सबसे बड़ा मुद्दा लंबे समय से ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा है। ट्रंप प्रशासन ने लगातार कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। लेकिन WSJ के मुताबिक, ट्रंप ने हाल की बैठकों में अधिकारियों से कहा है कि अमेरिका द्वारा ईरान की प्रमुख परमाणु सुविधाओं को नुकसान पहुंचाए जाने के बाद तेहरान के लिए अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करना मुश्किल हो सकता है।

ट्रंप का मानना है कि अमेरिकी खुफिया तंत्र ईरान की किसी भी नई परमाणु गतिविधि का पता लगा सकता है और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की धमकी ईरान को दोबारा परमाणु हथियार बनाने से रोक सकती है। इसी सोच के चलते ट्रंप प्रशासन परमाणु समझौते को तत्काल हासिल करने के बजाय होर्मुज़ में समुद्री यातायात बहाल कराने को प्राथमिकता दे सकता है।

ईरान की आर्थिक मांगें बन सकती हैं सबसे बड़ी अड़चन
संभावित समझौते में सबसे मुश्किल मुद्दों में से एक ईरान की आर्थिक मांगें हो सकती हैं। तेहरान अरबों डॉलर की युद्ध क्षतिपूर्ति और विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों को जारी करने की मांग कर रहा है। ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि अमेरिकी करदाताओं का पैसा ईरान को नहीं दिया जाएगा। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक किसी समझौते के लिए ईरान की कुछ जमी हुई संपत्तियों को शर्तों के साथ जारी करने पर विचार करना पड़ सकता है। इसके अलावा, ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की अनुमति देने और प्रतिबंधों में छूट देने का मुद्दा भी अहम होगा।

क्या बिना परमाणु समझौते के खत्म होगा संघर्ष?
अगर ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक और सैन्य जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह बहाल करने पर सहमत होता है, तो ट्रंप के पास परमाणु समझौते के बिना भी संघर्ष समाप्त करने का रास्ता खुल सकता है। लेकिन ईरान की मौजूदा मांगें बताती हैं कि तेहरान केवल जलडमरूमध्य खोलने के बदले अमेरिकी रियायतें हासिल करना चाहता है। ऐसे में आने वाले दिनों में बातचीत का केंद्र परमाणु कार्यक्रम से हटकर होर्मुज़, प्रतिबंधों, अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और आर्थिक मुआवजे पर आ सकता है।

- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Latest article