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Friday, September 11, 2026

खड़े हनुमान मंदिर को लेकर उमा भारती ने मोहन यादव को लिखा पत्र, शिवराज के समय भोपाल की मस्जिद का दिया उदाहरण

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उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर का मुद्दा अब काफी गर्मा गया है। हिंदू संगठनों के साथ ही अब नेताओं की बयानबाजी भी तेज हो गई है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम उमा भारती ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा है।
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित खड़े हनुमान मंदिर को हटाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता उमा भारती ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा है। उमा भारती ने पत्र के जरिए मंदिर के संरक्षण की मांग उठाते हुए विकास कार्यों के साथ धार्मिक आस्था का संतुलन बनाए रखने की अपील की है।
मंदिर की आस्था रहे सुरक्षित
उमा भारती ने अपने पत्र में कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं उज्जैन के रहने वाले हैं। ऐसे में उज्जयिनी शहर और वहां मौजूद धार्मिक स्थलों की गरिमा को उनसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता है। उन्होंने खड़े हनुमान मंदिर को लेकर ऐसा समाधान निकालने की अपील की, जिससे विकास कार्य भी पूर्व सीएम शिवराज चौहान के कार्यकाल का दिया उदाहरण
अपने सुझाव के समर्थन में उमा भारती ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि भोपाल में कमलापति पार्क के सामने सड़क चौड़ीकरण के दौरान वहां मौजूद एक मस्जिद को नहीं हटाया गया था। सरकार ने धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए सड़क का पूरा प्लान बदल दिया और वैकल्पिक तरीके से सड़क का निर्माण कराया था।

‘विकास और आस्था साथ-साथ’
उमा भारती ने कहा कि बीजेपी की सरकारें विकास और आस्था दोनों को साथ लेकर चलती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से अपील की कि उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर के मामले में भी भोपाल की तरह रास्ता निकाला जा सकता है। उनका कहना है कि विकास के लिए ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे धार्मिक स्थल को हटाने की जरूरत न पड़े और श्रद्धालुओं की आस्था भी बनी रहे।

जानिए क्या है खड़े हनुमान मंदिर का मामला?
बता दें कि उज्जैन के कंठाल चौराहा से छत्री चौक/बड़ा सराफा मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी रास्ते में करीब 170 साल पुराना खड़े हनुमान मंदिर आता है। सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर के बाहरी ढांचे को हटाया गया, लेकिन करीब 8 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की कोशिशें सफल नहीं हुईं। भारी मशीनों और तकनीकी प्रयासों के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली।

इस घटना के बाद श्रद्धालुओं में आस्था और बढ़ गई। कई लोग इसे चमत्कार या दैवीय संकेत मान रहे हैं, जबकि प्रशासन और विशेषज्ञ प्रतिमा के जमीन में कितने गहरे आधार पर टिकी होने जैसी तकनीकी वजहों की जांच कर रहे हैं।प्रभावित न हों और मंदिर की आस्था भी सुरक्षित रहे।

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