सतना (मध्य प्रदेश)। सतना जिले के जसो थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बडेरा के वार्ड क्रमांक-8 निवासी सोनेलाल कुशवाहा (पुत्र आशाराम कुशवाहा) ने पंचायत व्यवस्था और ग्रामीण विकास कार्यों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वर्षों से सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए अधिकारियों और पंचायत के चक्कर लगाने के बावजूद आज तक उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका। पीड़ित का आरोप है कि करीब 15 से 20 वर्षों से वह पक्के आवास की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन उनकी हर गुहार अनसुनी कर दी गई।
सोनेलाल कुशवाहा का आरोप है कि गांव के पूर्व सरपंच लालजी पांडे, जो लगातार तीन कार्यकाल तक सरपंच रहे, ने अपने कार्यकाल में सरकारी योजनाओं का लाभ कथित रूप से अपने करीबी और समर्थक लोगों तक ही सीमित रखा। उनका कहना है कि पात्र होने के बावजूद उन्हें आवास योजना से वंचित रखा गया, जबकि अन्य लोगों को प्राथमिकता के आधार पर लाभ दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत में पारदर्शिता की कमी रही और योजनाओं का लाभ समान रूप से नहीं बांटा गया।
ग्रामीण ने वर्तमान सरपंच फूलकली वर्मा पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि वर्तमान पंचायत भी स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर रही है और अधिकांश निर्णय पूर्व सरपंच के प्रभाव में लिए जा रहे हैं। उनका कहना है कि गांव में विकास कार्य लगभग ठप हैं और आम नागरिकों की मूलभूत समस्याओं के समाधान की ओर कोई गंभीर पहल नहीं की जा रही।
सोनेलाल कुशवाहा ने गांव के शासकीय विद्यालय की जर्जर स्थिति का भी मुद्दा उठाया। उनके अनुसार विद्यालय की छत पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है और बारिश के दिनों में कक्षाओं के भीतर पानी टपकता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इसके अलावा गांव के लोक सेवा केंद्र की स्थिति भी खराब बताई गई है, जहां लंबे समय से आवश्यक मरम्मत नहीं कराई गई।
पीड़ित का आरोप है कि पंचायत में आने वाले विकास कार्यों के लिए स्वीकृत फंड का समुचित उपयोग नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि गांव में नालियों का निर्माण, सफाई व्यवस्था, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक है। उनका दावा है कि विकास के नाम पर धरातल पर अपेक्षित कार्य दिखाई नहीं दे रहे हैं।
सोनेलाल कुशवाहा ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि पंचायत स्तर पर योजनाओं और विकास कार्यों की पारदर्शी जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उन्होंने यह भी अपील की कि उनकी समस्या शासन-प्रशासन तक पहुंचाई जाए ताकि वर्षों से लंबित आवास और अन्य मूलभूत सुविधाओं का लाभ उन्हें मिल सके।
