शामली। उत्तर प्रदेश के शामली जिले के थाना भवन क्षेत्र के भैसानी इस्लामपुर में जमीन विवाद को लेकर महिला फरमान ने गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़िता नसीम का कहना है कि वह पिछले छह से सात महीनों से जमीन संबंधी विवाद और कथित धमकियों के कारण बेहद परेशान हैं। उनका आरोप है कि हाईवे रोड के पास स्थित उनकी करीब पौने दो बीघा जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। पुश्तैनी जमीन पर लंबे समय से उनके परिवार का कब्जा रहा है, लेकिन अब दाखिल-खारिज की प्रक्रिया के बाद जमीन जाबिर के नाम दर्ज होने की बात सामने आ रही है। इस घटनाक्रम से नसीम खुद को असहाय महसूस कर रही हैं और लगातार अधिकारियों से न्याय की मांग कर रही हैं।
पीड़िता फरमान के अनुसार, जब उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन वापस दिलाने की मांग की, तो उन्हें राहत नहीं मिली। उनका आरोप है कि जमीन के दाखिल-खारिज में उनके डीलर जाबिर के भाई रहीस को गवाह बनाकर वकील के माध्यम से कार्रवाई कराई गई। फरमान का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया को लेकर उन्हें गंभीर आपत्ति है और वह जमीन से जुड़े मामले की निष्पक्ष जांच चाहती हैं। उनका दावा है कि वर्षों से जमीन पर उनके परिवार का कब्जा रहा है, इसके बावजूद अब जमीन के रिकॉर्ड में दूसरे व्यक्ति जाबिर का नाम सामने आने से उनका विवाद और बढ़ गया है। हालांकि, जमीन के स्वामित्व, दाखिल-खारिज और कब्जे से जुड़े तथ्यों की पुष्टि संबंधित राजस्व अभिलेखों तथा सक्षम अधिकारियों की जांच से ही हो सकेगी।
फरमान ने आरोप लगाया कि जमीन को लेकर आवाज उठाने पर उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि उनके पीछे कथित तौर पर गुंडे-बदमाश लगाए जाते हैं, जिससे वह भय और तनाव के माहौल में रहने को मजबूर हैं। पीड़िता ने मारपीट किए जाने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि जब वह अपनी शिकायत लेकर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने पहुंचती हैं, तब भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। नसीम का आरोप है कि उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है और उन्हें अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।
पीड़िता फरमान ने अपने पारिवारिक हालात का जिक्र करते हुए बताया कि उनके भाई और मां के निधन के बाद उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं। उनका आरोप है कि राशन कार्ड से संबंधित समस्या के कारण उन्हें राशन का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। जमीन विवाद, कथित धमकियों, मारपीट की शिकायत और सरकारी योजनाओं से जुड़े सवालों के बीच फरमान का कहना है कि उनके सामने रोजमर्रा की जिंदगी चलाना भी मुश्किल हो गया है। वह चाहती हैं कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और उन्हें सुरक्षा के साथ-साथ नियमानुसार राहत मिले।
फरमान के अनुसार, उनकी पुश्तैनी जमीन से संबंधित मामला न्यायालय में भी विचाराधीन है, लेकिन उन्हें वहां से भी अब तक अपेक्षित राहत नहीं मिली है। उनका कहना है कि वह विभिन्न स्तरों पर अपनी बात रख चुकी हैं और संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन भी कर चुकी हैं, मगर उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। पीड़िता की मांग है कि जमीन के पुराने कब्जे, राजस्व अभिलेखों, दाखिल-खारिज की प्रक्रिया और गवाहों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो जांच के आधार पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जमीन के दस्तावेजों और कब्जे से जुड़े विवाद की निष्पक्ष जांच कब होगी और पीड़िता की शिकायतों पर संबंधित अधिकारी क्या कदम उठाएंगे। फरमान ने प्रशासन और पुलिस से अपील की है कि उनकी शिकायत को केवल औपचारिकता न माना जाए, बल्कि सभी तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने कथित धमकियों और मारपीट की शिकायत की भी जांच कराने तथा सुरक्षा संबंधी जरूरतों पर ध्यान देने की मांग की है।
पीड़िता फरमान और उनका परिवार न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं। उनका कहना है कि वह लंबे समय से इस विवाद के कारण मानसिक और आर्थिक परेशानी झेल रही हैं। अब वह चाहती हैं कि समय रहते उनकी समस्या का समाधान हो, जमीन से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो और उन्हें कानून के अनुसार न्याय मिल सके। फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
