दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अहम मुलाकात होगी। दोनों नेताओं के बीच सीमा, रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, वीजा और उड़ानों जैसे मुद्दों पर चर्चा संभव है।
मोदी-जिनपिंग की शाम 5:45 बजे मुलाकात, रक्षा, सुरक्षा और व्यापार पर होगी अहम बातचीत।
भारत-चीन के बीच 151 अरब डॉलर के व्यापार में बड़ा घाटा, बातचीत में उठेगा ये मुद्दा।
BRICS में मोदी-पुतिन-जिनपिंग एक मंच पर, बदलती वैश्विक व्यवस्था पर दुनिया की नजर।
नई दिल्ली: दिल्ली में आज से 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत हो रही है। दो दिन चलने वाले इस सम्मेलन में दुनिया की नजर भारत पर रहेगी। भारत मंडपम में BRICS देशों के राष्ट्राध्यक्ष एक मंच पर दिखाई देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी इस बैठक को खास बना रही है। सम्मेलन में दुनिया की करीब आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले देशों के नेता कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
BRICS समिट के दौरान आज एशिया की 2 बड़ी ताकतों भारत और चीन के नेताओं की मुलाकात भी होगी। शी जिनपिंग करीब 7 साल बाद भारत दौरे पर आ रहे हैं। दोपहर 12:35 बजे उनका विमान दिल्ली में लैंड करेगा। इसके बाद शाम 5:45 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच हाई प्रोफाइल द्विपक्षीय बैठक होगी।
मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर
प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग पिछले तीन साल में विदेशों में तीन बार मिल चुके हैं। कज़ान और तियानजिन की मुलाकातों के बाद दोनों नेताओं की यह लगातार तीसरे साल होने वाली बैठक है। हालांकि, भारत की धरती पर दोनों नेता करीब 7 साल बाद आमने-सामने होंगे। 2020 में गलवान में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्तों में काफी तनाव आया था। सीमा पर दोनों देशों की सेनाएं लंबे समय तक आमने-सामने रहीं। इसके अलावा व्यापार को लेकर भी दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा और भारत में चीनी सामान के विरोध की आवाजें उठीं।
ऐसे में आज होने वाली मोदी-जिनपिंग मुलाकात को रिश्तों में जमी बर्फ पिघलाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत का मुख्य फोकस तनाव कम करने, भरोसा बहाल करने और भविष्य के रिश्तों की दिशा तय करने पर हो सकता है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन और भारत दोनों नेताओं की द्विपक्षीय बातचीत के लिए तैयारियां कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कज़ान और तियानजिन के बाद यह लगातार तीसरा साल है जब दोनों नेता मिल रहे हैं।
चीन भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है और दोनों देशों के बीच रिश्तों को रणनीतिक और लंबे समय के नजरिए से आगे बढ़ाना चाहता है। चीन का कहना है कि दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ना चाहिए, विवादों का उचित समाधान निकाला जाना चाहिए और आपसी संवाद मजबूत होना चाहिए। दोनों देश अच्छे पड़ोसी की तरह एक-दूसरे की सफलता में योगदान देने वाले साझेदार बनें, यही चीन की कोशिश है।
बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
सूत्रों के मुताबिक, मोदी-जिनपिंग बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। इनमें सैन्य और राजनयिक संवाद को मजबूत करना, भारतीय कंपनियों को चीन के बाजार में ज्यादा पहुंच देना और भारत के व्यापार घाटे को कम करना शामिल है।इसके अलावा भारतीय निर्यात बढ़ाने, मशीनरी और टेक्नोलॉजी की सप्लाई आसान करने, चीनी निवेश के लिए भरोसेमंद नियम बनाने और दोनों देशों के बीच वीजा, उड़ानों और आवाजाही को आसान करने पर भी बात हो सकती है।
भारत और चीन के बीच इस समय करीब 151 अरब डॉलर का व्यापार है। इसमें भारत करीब 131 अरब डॉलर का सामान चीन से आयात करता है, जबकि चीन को भारत का निर्यात करीब 20 अरब डॉलर है। यानी भारत का चीन के साथ बड़ा व्यापार घाटा है। भारत इस अंतर को कम करने की कोशिश करेगा।
चीन के साथ ट्रेड में भारत की बड़ी मांग
BRICS समिट से एक दिन पहले BRICS बिजनेस फोरम की बैठक में भी व्यापार का मुद्दा प्रमुख रहा। भारत ने BRICS देशों से अपने बाजार एक-दूसरे के लिए खोलने की मांग की। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत BRICS को अपने उत्पादों के लिए एक अहम बाजार के तौर पर देखता है। भारत चाहता है कि भरोसेमंद साझीदारों के जरिए उसके उत्पाद दुनिया के अलग-अलग बाजारों तक पहुंचें। उन्होंने कहा कि साझेदार देशों के साथ व्यापार गहरा, मजबूत और अलग-अलग स्रोतों वाली सप्लाई चेन पर आधारित होना चाहिए।
पीयूष गोयल ने कहा कि BRICS देशों को एक-दूसरे के उत्पादों के लिए अपने बाजार खोलने चाहिए। इसमें कच्चा माल और जरूरी खनिज भी शामिल हैं। इसका मकसद व्यापार और कारोबार को सदस्य देशों के लोगों की बेहतरी का जरिया बनाना है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने भी भारत और चीन के आर्थिक रिश्तों को दोनों देशों के फायदे वाला बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत अपने यहां कारोबार करने वाली सभी देशों की कंपनियों के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना भेदभाव वाला कारोबारी माहौल उपलब्ध कराएगा।
BRICS में चीन से क्या उम्मीद?
चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और BRICS के दूसरे कई देशों की तुलना में उसका आर्थिक आकार काफी बड़ा है। इसलिए BRICS समिट में चीन से सबसे बड़ी उम्मीद उसके बाजार को दूसरे सदस्य देशों के लिए खोलने की है। भारत चाहता है कि चीन के साथ व्यापार में संतुलन बने और भारतीय कंपनियों को चीन के बाजार में ज्यादा अवसर मिलें। वहीं चीन BRICS के मंच का इस्तेमाल युद्ध, ट्रेड वॉर और जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के लिए करना चाहता है।
चीन के लिए BRICS अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ट्रेड वॉर और टैरिफ नीतियों से निपटने के लिए भी अहम मंच है। इस मुद्दे पर भारत और चीन कई जगह एक जैसे हित रखते हैं। चीन की पत्रकार ली जिनजिंग के मुताबिक, व्यापार युद्ध और टैरिफ का असर सिर्फ चीन पर नहीं बल्कि भारत और दूसरे देशों पर भी पड़ा है। उनके मुताबिक अब भारत और चीन के नेता बातचीत और सहयोग के जरिए इसका समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी देश जबरदस्ती लड़ाई नहीं चाहता और बातचीत से विवाद सुलझाना चीन, भारत, अमेरिका समेत सभी देशों के लोगों के लिए फायदेमंद होगा।
PM मोदी की पुतिन और पेजेश्कियान से भी मुलाकात
BRICS समिट से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात की। मोदी और पुतिन के बीच करीब 45 मिनट तक वन-टू-वन बातचीत हुई। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ प्रधानमंत्री की करीब 40 मिनट तक बातचीत हुई। दोनों मुलाकातों में नेताओं के बीच गर्मजोशी और बेहतर तालमेल दिखाई दिया। BRICS के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का हाथ जोर से थामे देखा गया, जिसका दुनिया को अहम संदेश गया।
इन बैठकों में प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश की कि युद्ध का रास्ता नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए विवादों का समाधान होना चाहिए। BRICS बिजनेस फोरम में भी प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत दुनिया को ग्लोबल भरोसा दे रहा है। ऐसे में BRICS समिट से भारत यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि सदस्य देश एक-दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ सकते हैं।
जिनपिंग के भारत दौरे को चीन ने बताया अहम
शी जिनपिंग के भारत पहुंचने से पहले भारत में चीन के राजदूत शू फेहॉन्ग ने सोशल मीडिया पर इस दौरे को अहम बताया। उन्होंने कहा कि कज़ान और तियानजिन में हुई मुलाकातों के बाद यह लगातार तीसरा साल है जब दोनों नेता एक-दूसरे से मिलेंगे। राजदूत के मुताबिक, बैठक में दोनों देशों के रिश्तों और सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। चीन भारत के साथ मिलकर ऐसे दोस्ताना रिश्ते बनाना चाहता है, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे की सफलता में मददगार साझेदार बनें।
आज BRICS में क्या-क्या होगा?
आज BRICS समिट में कई अहम कार्यक्रम होंगे। दोपहर 2:35 बजे BRICS सदस्य देशों के नेताओं का क्लोज्ड डोर सेशन होगा। इसकी थीम ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ होगी। इसके बाद शाम 4:25 बजे BRICS लीडर्स ‘Bharat Innovates Exhibition’ का दौरा करेंगे। शाम 5:05 बजे नेताओं का आधिकारिक फैमिली फोटो सेशन होगा। इसके साथ संयुक्त पौधारोपण समारोह भी आयोजित किया जाएगा। इसके बाद शाम 7:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में BRICS देशों के नेताओं के लिए डिनर का आयोजन होगा।
क्यों अहम होने जा रहा है BRICS समिट?
कुल मिलाकर आज दिल्ली में होने वाली मोदी-जिनपिंग मुलाकात सिर्फ भारत-चीन रिश्तों के लिहाज से ही नहीं, बल्कि BRICS और बदलती वैश्विक व्यवस्था के लिए भी अहम मानी जा रही है। रक्षा और सुरक्षा से लेकर व्यापार, निवेश, वीजा और उड़ानों तक कई मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। बैठक के बाद कुछ बड़े ऐलान होने की भी उम्मीद है। BRICS के मंच पर मोदी, जिनपिंग और पुतिन जैसे बड़े नेताओं की एक साथ मौजूदगी को वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। ऐसे में आज दिल्ली में होने वाली हर बड़ी गतिविधि पर दुनिया की नजर रहेगी।
