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Tuesday, September 1, 2026

सहरसा में बच्ची के जन्म के बाद देवी रूप की चर्चा, झोपड़ी में रहने वाला परिवार आर्थिक मदद का मोहताज

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सहरसा। जिले के मोहनपुर क्षेत्र में 27 अगस्त 2026 की सुबह एक बच्ची के जन्म के बाद परिवार में खुशी के साथ धार्मिक आस्था से जुड़ी चर्चा शुरू हो गई। रूबी देवी ने बताया कि उनकी भाभी मिली कुमारी, पति जूनियर सदा, ने एक बच्ची को जन्म दिया है। परिजन बच्ची को देवी का रूप मान रहे हैं, जिसके कारण गांव में भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

परिजनों के अनुसार परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। परिवार झोपड़ी में रहकर किसी तरह अपना जीवन गुजार रहा है। नवजात बच्ची की देखभाल के साथ परिवार के सामने भोजन, कपड़े और अन्य जरूरी जरूरतें पूरी करने की चुनौती भी बनी हुई है। परिजन चाहते हैं कि सरकारी स्तर पर परिवार की स्थिति का आकलन कर उन्हें आर्थिक और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाए।

रूबी देवी का कहना है कि परिवार में इससे पहले भी एक बच्चे का जन्म हुआ था, जिसे परिजनों ने बजरंगबली का रूप बताया था। हालांकि जन्म के करीब 24 घंटे के भीतर उस बच्चे की मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार में एक बेटे का जन्म हुआ, जो वर्तमान में स्वस्थ बताया जा रहा है।

अब तीसरी संतान के रूप में बच्ची के जन्म के बाद परिजन उसे देवी का रूप बता रहे हैं। परिवार की आस्था अपनी जगह है, लेकिन नवजात के किसी धार्मिक स्वरूप की चिकित्सकीय पुष्टि नहीं हुई है। बच्ची और मां के स्वास्थ्य के लिए नियमित चिकित्सकीय जांच और आवश्यक देखभाल जरूरी है।

बताया गया है कि परिवार का पता मैना, वार्ड नंबर 06, नाहरवर, मैना ग्राम, सहरसा से जुड़ा है। आर्थिक तंगी के कारण परिवार को बच्चों की परवरिश में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। परिजनों का कहना है कि यदि समाज के सक्षम लोग और प्रशासन आगे आएं तो परिवार को बड़ी राहत मिल सकती है।

परिवार ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि उनकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए और रहने तथा बच्चों की देखभाल के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए। नवजात बच्ची के जन्म को लेकर गांव में भले ही देवी रूप की चर्चा हो रही हो, लेकिन परिवार की वास्तविक जरूरत फिलहाल आर्थिक सहारे और मां-बच्ची की बेहतर देखभाल की है।

विशेषज्ञों के अनुसार नवजात के शरीर या जन्म से जुड़ी किसी विशेष विशेषता को धार्मिक स्वरूप मानने से पहले चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। परिवार को भी बच्ची के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए चिकित्सकों की सलाह के अनुसार देखभाल करनी चाहिए।

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