रायबरेली। जिले के शिवगढ़ थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला पारिवारिक विवाद सामने आया है, जहां तीन छोटे बच्चों की मां को छोड़कर पति दूसरी महिला के साथ फरार हो गया। पीड़िता का आरोप है कि पति ने बिना तलाक दिए दूसरी महिला से कोर्ट मैरिज कर ली है और अब उसे तथा उसके बच्चों को बेसहारा छोड़ दिया है। आर्थिक तंगी से जूझ रही महिला ने प्रशासन से न्याय दिलाने और बच्चों के पालन-पोषण के लिए मदद की गुहार लगाई है।
मामला शिवगढ़ थाना क्षेत्र के मठगोसई गांव की रहने वाली रेशमी से जुड़ा है। रेशमी का कहना है कि उसकी शादी करीब छह साल पहले दुर्गा प्रसाद से हुई थी। शादी के बाद दोनों के तीन बच्चे हुए। बड़ा बेटा प्रिंस करीब तीन साल का है, बेटी वैष्णवी चार साल की है और सबसे छोटा बेटा प्रीतम अभी महज छह महीने का है। रेशमी के अनुसार शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य था, लेकिन समय के साथ पति का व्यवहार बदलने लगा।
पीड़िता का आरोप है कि करीब पांच महीने पहले उसे पता चला कि उसका पति किसी दूसरी महिला के साथ चला गया है। बाद में जानकारी मिली कि वह महिला मीना कुमारी है, जो ओल्हेपुर गांव की रहने वाली है। रेशमी का कहना है कि दोनों के संबंध काफी समय से थे और एक दिन दुर्गा प्रसाद मीना कुमारी को लेकर घर से फरार हो गया।
रेशमी के मुताबिक कुछ समय बाद उसे पता चला कि उसका पति लोनी कटरा थाना क्षेत्र में किसी मामले में पकड़ा गया था। उसी दौरान उसे जानकारी मिली कि दुर्गा प्रसाद मीना कुमारी के साथ ही रह रहा है। आरोप है कि दोनों फिलहाल रेशमी की ननद कमलेश कुमारी के यहां रह रहे हैं, जो रीमा गांव की रहने वाली है।
पीड़िता का यह भी कहना है कि हाल ही में उसे यह जानकारी मिली है कि दुर्गा प्रसाद और मीना कुमारी ने कोर्ट में शादी भी कर ली है, जबकि उससे अभी तक न तो तलाक लिया गया है और न ही इस बारे में उसे कोई सूचना दी गई। रेशमी का आरोप है कि ससुराल पक्ष के लोग भी उसके पति का ही साथ दे रहे हैं। उसकी सास का पहले ही निधन हो चुका है, जबकि ससुर छोटेलाल और उनके बड़े भाई राम समुद्र भी उसके पति का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में ससुराल में उसका साथ देने वाला कोई नहीं बचा है।
रेशमी ने बताया कि पति के घर छोड़कर जाने के बाद उसकी स्थिति बेहद खराब हो गई। वह ससुराल में ही रह रही थी, लेकिन पति न तो बच्चों के लिए खर्च देता था और न ही खाने-पीने का इंतजाम करता था। हालात इतने खराब हो गए कि घर में अनाज तक नहीं बचा था और बच्चे भूख से तड़पने लगे थे। मजबूर होकर करीब एक महीने पहले वह अपने तीनों बच्चों को लेकर मायके चली गई।
पीड़िता का कहना है कि अब वह पूरी तरह असहाय हो चुकी है। उसके पास बच्चों के पालन-पोषण के लिए कोई साधन नहीं है। पति की ओर से न तो खर्चा दिया जा रहा है और न ही कोई जिम्मेदारी निभाई जा रही है। ऐसे में वह अपने तीनों छोटे बच्चों के साथ मुश्किल हालात में जीवन गुजारने को मजबूर है।
रेशमी ने मीडिया के माध्यम से प्रशासन से अपील की है कि उसके मामले में जल्द कार्रवाई की जाए। उसका कहना है कि उसे न्याय दिलाया जाए, बच्चों के पालन-पोषण के लिए खर्च दिलवाया जाए और उसे ससुराल में सुरक्षित रहने का अधिकार मिले। पीड़िता को उम्मीद है कि प्रशासन उसकी स्थिति को समझते हुए उचित कदम उठाएगा और उसे न्याय मिलेगा।
