शराबी दबंगों ने मकान तोड़ा, छोटे भाई को पूरी जमीन, बड़ा भाई दर-दर भटकने को मजबूर
समस्तीपुर।
बिहार के समस्तीपुर जिले के सिंधिया थाना क्षेत्र अंतर्गत लिलहौल ग्राम कचहरी से एक चौंकाने वाला और ग्रामीण न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। यहां जमीन विवाद, दबंगई, शराब के नशे में उत्पात और कथित रूप से ग्राम कचहरी के संरक्षण में बड़े भाई को जमीन से वंचित किए जाने के आरोप लगे हैं।
प्रथम पक्ष मो. जलाल नदाफ पिता मोठ सज्जाल नदाफ, निवासी ग्राम लिलहौल ने ग्राम कचहरी में लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया कि द्वितीय पक्ष औसर गदापु लगातार शराब के नशे में पक्का मकान तोड़ता है और सामाजिक समझाइश के बावजूद किसी की बात नहीं मानता। मौके पर की गई जांच में यह भी पाया गया कि द्वितीय पक्ष बेहद झगड़ालू प्रवृत्ति का है और पहले भी कई बार इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दे चुका है।
ग्राम कचहरी द्वारा आदेश पारित कर कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की गई, लेकिन पीड़ित पक्ष का आरोप है कि कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई। इसी बीच एक और गंभीर मामला सामने आया, जिसमें वादी सज्जाद नदाफ ने ग्राम कचहरी वाद संख्या 05/18 (सिविल वाद) के तहत शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में बताया गया कि उनके पिता की कुल 1 कट्ठा 17 धूर जमीन थी, जिसे दो बेटों — मो. जलाल (बड़ा भाई) और मो. मन्नल (छोटा भाई) में बराबर बांटा जाना था। आरोप है कि पिता के जीवित रहते ही छोटे बेटे मो. मन्नल ने उन्हें बहला-फुसलाकर, कथित रूप से तत्कालीन सरपंच असलम के सहयोग से, पूरी जमीन अपने नाम करवा ली।
दस्तावेजों के अनुसार, कुछ जमीन केवाला के जरिए अन्य लोगों को भी हस्तांतरित कर दी गई, जबकि शेष भूमि पर प्रतिवादी ने जबरन कब्जा कर लिया। वादी का आरोप है कि उसी जमीन पर उन्होंने खपरैल का घर बना रखा था, लेकिन अब वे खुद ही अपनी जमीन पर बेदखल हो चुके हैं।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि पिता के निधन को करीब डेढ़ साल हो चुके हैं, लेकिन आज तक बड़े भाई को एक इंच जमीन भी नहीं मिली। उन्होंने ग्राम कचहरी, सरपंच और प्रशासन को कई बार लिखित आवेदन दिए, लेकिन हर बार मामले को नजरअंदाज कर दिया गया।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि ग्राम कचहरी और तत्कालीन सरपंच असलम की भूमिका संदिग्ध रही है। पीड़ित का कहना है कि जब न्याय की चौखट पर जाने के बाद भी इंसाफ न मिले, तो आम आदमी जाए तो जाए कहां।
पीड़ित परिवार अब प्रशासन और जिला स्तर पर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि एक ही पिता के दो बेटों में से एक को पूरी जमीन कैसे मिल गई और दूसरा न्याय के लिए भटकने को क्यों मजबूर है।
यह मामला न सिर्फ जमीन विवाद का है, बल्कि ग्राम कचहरी व्यवस्था, स्थानीय दबंगों और प्रशासनिक उदासीनता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
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