विशेष संवाददाता की रिपोर्ट
फर्रुखाबाद। थाना मोहम्मदाबाद क्षेत्र के ग्राम कान्हेपुर, जिला फर्रुखाबाद निवासी बबली पत्नी कंचन लाल ने अपने बड़े जेठ किशनपाल पर पुश्तैनी जमीन पर कथित अवैध कब्जा और निर्माण कराने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि उनका परिवार रोजगार के सिलसिले में फरीदाबाद (हरियाणा) में रहता है। इसी का फायदा उठाकर उनकी अनुपस्थिति में उनके हिस्से की जमीन पर शौचालय और अन्य निर्माण करा दिए गए।
बबली के अनुसार जुलाई माह में जब वह अपने पैतृक गांव ग्राम कान्हेपुर पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि उनके हिस्से की जमीन पर शौचालय का निर्माण कर दिया गया है। उनका आरोप है कि बड़े जेठ किशनपाल ने अपने हिस्से के अलावा उनके हिस्से की जमीन पर भी निर्माण कराया है। इतना ही नहीं, परिवार के एक भतीजे, जिसके माता-पिता का निधन हो चुका है, उसके हिस्से की जमीन पर भी मकान बना लिया गया। वहीं छोटे भाई के हिस्से में भी शौचालय का निर्माण कर दिया गया।
पीड़िता ने बताया कि पूरे मामले को लेकर ग्राम पंचायत बुलाई गई। पंचायत में दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद कथित रूप से यह निर्णय लिया गया कि शौचालय गलत स्थान पर बनाया गया है और उसे हटाया जाना चाहिए। पंचायत ने निर्माण हटाने के साथ-साथ हुए नुकसान की भरपाई करने की भी बात कही। इसके बावजूद आरोप है कि संबंधित पक्ष पंचायत के फैसले को मानने के लिए तैयार नहीं है और आज तक निर्माण नहीं हटाया गया।
बबली का कहना है कि विवाद के दौरान एक पक्ष पुलिस को भी मौके पर लेकर आया। उनके अनुसार पुलिस ने यह कहते हुए हस्तक्षेप नहीं किया कि यह ग्राम पंचायत की जमीन है। इस पर पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि भूमि ग्राम पंचायत की होती तो पंचायत उनके पक्ष में यह निर्णय क्यों देती कि शौचालय उनके हिस्से की जमीन पर बनाया गया है और उसे हटाया जाए। परिवार का दावा है कि पंचायत का फैसला ही इस बात का प्रमाण है कि संबंधित भूमि उनके हिस्से की है।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि पंचायत का फैसला आने के बावजूद आज तक न तो शौचालय हटाया गया और न ही उनके हिस्से की जमीन उन्हें वापस सौंपी गई। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी भी हुई। उनका कहना है कि परिवार वर्षों से मेहनत-मजदूरी कर अपने भविष्य के लिए जमीन बचाए हुए था, लेकिन कथित अवैध निर्माण के कारण अब उन्हें अपने ही अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, पंचायत के निर्णय का पालन सुनिश्चित कराने, कथित अवैध निर्माण हटवाने तथा उन्हें उनकी पुश्तैनी जमीन का कब्जा दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च प्रशासनिक अधिकारियों और न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।
फिलहाल मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। समाचार में प्रकाशित आरोप शिकायतकर्ता के कथन पर आधारित हैं। संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने तथा प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
