आरा (बिहार)। भोजपुर जिले के ग्राम चौरी निवासी रिया कुमारी पासवान ने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के दौरान आर्थिक तंगी, सामाजिक भेदभाव और प्रशासनिक लापरवाही का सामना करने का दावा किया है। छात्रा का कहना है कि कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद उसने पढ़ाई जारी रखी, लेकिन रास्ते में कई ऐसी समस्याएं सामने आईं, जिन्होंने उसके भविष्य पर गहरा असर डाला।
रिया के अनुसार, वह एक गरीब किसान परिवार से आती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्हें ट्यूशन और अन्य शैक्षणिक सुविधाएं नहीं मिल सकीं। इसके बावजूद उन्होंने सरकारी स्कूल में पढ़ाई जारी रखी। उनका आरोप है कि छात्रवृत्ति, जाति प्रमाण-पत्र और अन्य दस्तावेजों से जुड़ी परेशानियों के कारण उन्हें सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल सका।
छात्रा का यह भी आरोप है कि पढ़ाई के दौरान उन्हें कई मानसिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और दलित परिवारों के बच्चों को आज भी अनेक समस्याओं से जूझना पड़ता है, जबकि उनकी शिकायतों पर समय पर ध्यान नहीं दिया जाता।
रिया ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, सम्मान और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के छात्रों को समय पर छात्रवृत्ति, आवश्यक दस्तावेजों में सुधार तथा सभी सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए।
यह मामला सरकारी स्कूलों की व्यवस्था, छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है। हालांकि, छात्रा द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि संबंधित विभाग इस मामले की जांच करता है, तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
