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Thursday, July 9, 2026

स्टे ऑर्डर को ठेंगा दिखाकर निर्माण का आरोप, जमीन विवाद में धमकियों से दहशत; पीड़ित ने प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

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शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के गोहपारू तहसील क्षेत्र के ग्राम अकुरी में जमीन और रास्ते के विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। मामला अब केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें न्यायालय के आदेश की कथित अवहेलना, दबंगई, धमकी और परिवार को प्रताड़ित किए जाने जैसे गंभीर आरोप भी जुड़ गए हैं। पीड़ित भैयालाल नामदेव ने प्रशासन और न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि विवादित भूमि पर स्टे ऑर्डर के बावजूद निर्माण कार्य कराया गया और विरोध करने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम अकुरी निवासी भैयालाल नामदेव ने नायब तहसीलदार न्यायालय और प्रशासन को दिए गए आवेदन में आरोप लगाया है कि उनकी पुश्तैनी भूमि से जुड़े विवाद में प्रतिपक्षी दीनबंधु नामदेव, श्रीमती सुषमा नामदेव, प्रकाश नामदेव, पुष्पेंद्र नामदेव सहित अन्य लोग लगातार दबाव बना रहे हैं। पीड़ित का कहना है कि विवादित भूमि के एक हिस्से पर न्यायालय में मामला लंबित है और निर्माण कार्य पर स्थगन आदेश भी जारी किया गया था, इसके बावजूद कथित रूप से शौचालय और अन्य निर्माण कार्य कर दिए गए।

भैयालाल नामदेव का आरोप है कि संबंधित पक्ष ने न केवल न्यायालय के आदेश की अनदेखी की बल्कि विवादित भूमि के वास्तविक स्वरूप को भी बदल दिया। उनका कहना है कि जिस भूमि को लेकर विवाद चल रहा है, उसी पर जबरन निर्माण कर रास्ता और आंगन का हिस्सा भी प्रभावित कर दिया गया है, जिससे उनके परिवार को आने-जाने में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पीड़ित ने अपने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि विरोध करने पर उन्हें खुलेआम धमकियां दी गईं। आरोप है कि एक पक्ष ने कहा कि उसके पास लाखों रुपये हैं और वह थाना तथा तहसील तक को खरीद सकता है। इतना ही नहीं, कथित तौर पर यह भी कहा गया कि “जहां जाना है चले जाओ, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।” आवेदन में उल्लेख है कि परिवार को खत्म कर देने और ऐसा हाल करने की धमकी दी गई कि पीढ़ियों तक कोई दिया जलाने वाला नहीं बचेगा।

मामले में एक और गंभीर आरोप यह है कि परिवार की बुजुर्ग महिला छोटकी बाई के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया था। पीड़ित का दावा है कि विवाद के दौरान उन्हें हाथ पकड़कर घुमाया गया, जिससे वह जमीन पर गिर पड़ी थीं। इसके बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और बाद में उनका निधन हो गया। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पीड़ित परिवार इसे मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना का परिणाम मान रहा है।

भैयालाल नामदेव का कहना है कि न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश जारी होने के बाद भी निर्माण कार्य जारी रहा, जिससे संबंधित पक्षों के हौसले और बढ़ गए। उनका आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है और न ही आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है। इसी कारण परिवार लगातार भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन यापन कर रहा है।

पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि विवादित भूमि का सीमांकन कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए, रास्ता और आंगन का अधिकार बहाल किया जाए तथा न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर उचित धाराओं में कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

ग्राम अकुरी का यह मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर न्यायालय के आदेश की कथित अवहेलना के आरोप हैं, तो दूसरी ओर धमकी और दबंगई के गंभीर दावे। ऐसे में स्थानीय लोगों की निगाहें अब प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं कि आखिर इस विवाद का समाधान कब और कैसे निकलता है।

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