ALPA इंडिया ने पायलटों को एयरबस और बोइंग विमानों के बीच ट्रांसफर किए जाने की रफ्तार पर भी चिंता जताई है।
एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के लिए काम करने वाले अनुभवी पायलट इस्तीफा दे जा रहे हैं। पायलट संगठन एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALPA India) ने इस पूरे मामले पर चिंता जताते हुए टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा को चिट्ठी लिखकर जरूरी कदम उठाने की मांग की है।
अनुभवी पायलटों के पास होता है ऑपरेशन्स से जुड़ा कीमती अनुभव और संस्थागत ज्ञान
ALPA इंडिया ने एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस से अनुभवी पायलटों के जाने पर चिंता जताते हुए कहा कि अनुभवी पायलट सिर्फ कर्मचारियों की संख्या नहीं हैं, बल्कि उनके पास ऑपरेशन्स से जुड़ा कीमती अनुभव और संस्थागत ज्ञान होता है।
ALPA इंडिया ने नोएल टाटा को लिखी चिट्ठी
एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा को 31 अगस्त को भेजी चिट्ठी में एयर इंडिया ग्रुप में पायलट के नौकरी छोड़ने, सैलरी और बेनिफिट्स, रोस्टर सिस्टम, थकान संबंधी आंकड़ों और छुट्टियों समेत अलग-अलग पहलुओं की स्वतंत्र समीक्षा कराने का सुझाव दिया है।
किन वजहों से एयर इंडिया छोड़ रहे हैं अनुभवी पायलट
एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कहा कि उम्मीदों के अनुरूप सैलरी नहीं बढ़ने, बेनिफिट्स में कमी और कामकाजी परिस्थितियों तथा जीवन की गुणवत्ता में गिरावट के कारण अनुभवी कमांडर और सीनियर पायलट इस्तीफा देकर एयर इंडिया छोड़ रहे हैं। बताते चलें कि एयर इंडिया ग्रुप की एयरलाइन कंपनियों में 5000 से ज्यादा पायलट कार्यरत हैं।
एयरबस और बोइंग के बीच ट्रांसफर करना भी बड़ी वजह
ALPA इंडिया ने पायलटों को एयरबस और बोइंग विमानों के बीच ट्रांसफर किए जाने की रफ्तार पर भी चिंता जताई है। पायलट संगठन ने कहा कि ऐसे बदलाव के लिए पर्याप्त ट्रेनिंग और एक्सपीरियंस हासिल करने का समय जरूरी है।
सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम, ट्रेनिंग सिस्टम की गहन समीक्षा की जरूरत
संगठन ने इस साल की तीन घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनसे एयर इंडिया ग्रुप की सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम, ट्रेनिंग सिस्टम और कर्मचारियों से जुड़ी पॉलिसी की गहन समीक्षा की जरूरत सामने आती है।
हालांकि, संगठन ने कहा कि वो औपचारिक जांच के नतीजे आने से पहले इन घटनाओं के लिए पायलट को जिम्मेदार नहीं ठहरा रहा है। एएलपीए इंडिया ने कहा कि सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम को किसी घटना के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय संभावित जोखिमों की पहले पहचान करने और उन्हें रोकने में सक्षम होना चाहिए।
