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Sunday, February 15, 2026

खेसरा विवाद ने लिया गंभीर मोड़, दो भाइयों के बीच मारपीट व जान से मारने की धमकी का आरोप

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सीतामढ़ी।
सीतामढ़ी जिले के रीगा थाना क्षेत्र अंतर्गत रामनगरा गांव के वार्ड नंबर–6 में पुश्तैनी जमीन को लेकर दो भाइयों के बीच वर्षों पुराना विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। पीड़ित रविंद्र प्रसाद सिंह ने अपने बड़े भाई नथुनी सिंह पर हिस्से की जमीन पर अवैध कब्जा, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है।
पीड़ित के अनुसार वर्ष 2009 में पिता स्वर्गीय तुलसी सिंह की संपत्ति का आपसी सहमति से बंटवारा हुआ था। खेसरा संख्या 8657 की कुल पांच डिसमिल भूमि दोनों भाइयों में बराबर बांटी गई थी, लेकिन आरोप है कि बड़े भाई ने उनके हिस्से की लगभग 1.5 डिसमिल जमीन पर अब तक अवैध कब्जा कर रखा है। बीते दो वर्षों में इस विवाद को लेकर कई बार झगड़े, गाली-गलौज और मारपीट की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
रविंद्र प्रसाद सिंह का कहना है कि उन्होंने स्थानीय थाना से लेकर जिला और राज्य स्तर तक कई बार आवेदन दिए। यहां तक कि मुख्यमंत्री और डीजीपी बिहार तक गुहार लगाई गई, लेकिन किसी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से विपक्षी पक्ष का मनोबल लगातार बढ़ता गया। आरोप है कि आए दिन नए-नए विवाद खड़े कर पूरे परिवार को डराने-धमकाने का प्रयास किया जाता है।

पीड़ित ने 8 मार्च 2024 की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि उनकी निजी जमीन पर बिजली का खंभा लगाकर 6 से 7 फीट ऊंचाई पर सर्विस पॉइंट का तार ले जाने की कोशिश की गई। विरोध करने पर विवाद और बढ़ गया तथा जान से मारने का प्रयास किया गया। स्थिति बिगड़ने पर पीड़ित को अपनी जान बचाकर वहां से निकलना पड़ा और सीतामढ़ी पहुंचकर अधिकारियों को मोबाइल के माध्यम से सूचना देनी पड़ी।
मामले को लेकर पीड़ित ने डीसीएलआर सदर, जिला पदाधिकारी कार्यालय तथा अंचल अधिकारी रीगा को लिखित शिकायत सौंपते हुए जमीन से अतिक्रमण हटाने, अवैध बिजली कनेक्शन/सर्विस तार को तत्काल रोकने और अपने परिवार की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
पीड़ित का कहना है कि लगातार तनाव और विवाद के कारण वे मानसिक रूप से परेशान हैं और प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो विवाद और अधिक गंभीर रूप ले सकता है। फिलहाल पीड़ित को प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है।

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