मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के एक गांव बलिया बोझ प्रखंड में खेत में नवजात बच्ची मिलने का मामला सामने आया है। गांव की रहने वाली सुशीला देवी का कहना है कि उन्हें सुबह करीब 5 बजे खेत में एक नवजात बच्ची मिली थी। बच्ची की हालत देखकर वह उसे अपने घर ले आईं। उनके मुताबिक, बच्ची को देखने के लिए गांव के कई लोग भी पहुंचे थे। कुछ समय बाद जब लोग बच्ची को लेने आए और सुशीला देवी ने बच्ची को उन्हें नहीं सौंपा, तो पुलिस को बुला लिया गया। इसके बाद पुलिस बच्ची को अपने साथ ले गई और उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया। अब सुशीला देवी का कहना है कि पुलिस उन्हें बच्ची वापस नहीं देने की बात कह रही है। वह चाहती हैं कि उन्हें बच्ची की देखभाल करने का अवसर मिले।
सुशीला देवी के अनुसार, सुबह करीब 5 बजे खेत में बच्ची मिलने के बाद वह उसे अपने घर लेकर आई थीं। बच्ची महज कुछ दिन की बताई जा रही है। इतनी छोटी बच्ची को देखकर उन्होंने उसे अपने पास रखा। महिला का कहना है कि बच्ची को देखने के लिए गांव के कई लोग आए थे और इस घटना की जानकारी आसपास के लोगों को भी हुई थी। उनके मुताबिक, बच्ची को लेकर बाद में विवाद की स्थिति बन गई और पुलिस को बुलाया गया। पुलिस बच्ची को अपने साथ ले गई तथा सदर अस्पताल में भर्ती करा दिया।
सुशीला देवी का आरोप है कि बच्ची को अस्पताल ले जाने के बाद अब उन्हें बताया जा रहा है कि बच्ची उन्हें नहीं मिलेगी। महिला इस बात से परेशान हैं और प्रशासन से बच्ची के मामले में उचित कार्रवाई की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि यदि बच्ची की देखभाल के लिए उन्हें कानूनी रूप से अनुमति मिल सकती है, तो उन्हें बच्ची अपने पास रखने का अवसर दिया जाए। वह बच्ची के भविष्य को लेकर चिंतित हैं और चाहती हैं कि उसके पालन-पोषण के संबंध में उनकी बात भी सुनी जाए।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल नवजात बच्ची की सुरक्षा, उसके माता-पिता की पहचान और उसके भविष्य को लेकर है। खेत में इतनी छोटी बच्ची किस परिस्थिति में पहुंची, उसे वहां किसने छोड़ा और उसके परिजनों का पता लगाने के लिए क्या कार्रवाई की गई है, इन सवालों का जवाब सामने आना बाकी है। बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, लेकिन उसकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
सुशीला देवी ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनके मामले को गंभीरता से सुना जाए और बच्ची की देखभाल के संबंध में उचित निर्णय लिया जाए। हालांकि, नवजात बच्ची को अपने पास रखने का निर्णय संबंधित बाल कल्याण प्राधिकरण और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही हो सकता है। बच्ची की सुरक्षा और उसके सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को मामले की जांच करनी होगी। बच्ची के जैविक माता-पिता की पहचान और परिस्थितियों की जांच भी जरूरी है।
फिलहाल सुशीला देवी बच्ची को वापस पाने की उम्मीद में प्रशासन से मदद मांग रही हैं। परिवार का कहना है कि वह इस मामले में उचित कार्रवाई चाहता है, ताकि बच्ची के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच के बाद क्या निर्णय लेते हैं।
