अलीगढ़। थाना क्वासी गांव मधुबनी कॉलोनी आस्था, चमत्कार और रहस्य से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां अलीगढ़ जिले के थाना काशी क्षेत्र की मधुबनी कॉलोनी निवासी बिम्बी कुमारी ने दावा किया है कि भगवान लड्डू गोपाल स्वयं उसके साथ रहते हैं और अपने हाथों से उसकी मांग में सिंदूर भरते हैं। बिम्बी कुमारी का कहना है कि यह अनुभव पिछले कई वर्षों से हो रहा है, लेकिन पिछले 2 वर्षों में यह घटनाएं और स्पष्ट रूप से सामने आने लगी हैं।
बिम्बी कुमारी के अनुसार, शुरुआत में उसे इन घटनाओं का स्पष्ट एहसास नहीं था, लेकिन समय के साथ उसे यह अनुभव होने लगा कि वह भगवान की विशेष कृपा की पात्र है। उसने बताया कि कई साधु-संतों से भी इस बारे में चर्चा की गई, जिनमें से कई ने उसे “लड्डू गोपाल का अनन्य भक्त” बताया और कहा कि भगवान की उपस्थिति उसके भीतर है।
बिम्बी कुमारी ने दावा किया कि उसे पहले उच्च रक्तचाप (बीपी 160) और शुगर जैसी गंभीर बीमारियां थीं, लेकिन बिना किसी दवा के यह सभी समस्याएं ठीक हो गईं। वह इसे पूरी तरह लड्डू गोपाल की कृपा मानती है। उसके अनुसार, फागुन के समय उसे भगवान के दर्शन भी हुए, जहां वे शिव के रूप में प्रकट हुए और भजन गाते हुए नजर आए।
बिम्बी कुमारी का कहना है कि वह अक्सर भगवान की भक्ति में इतनी लीन हो जाती है कि उसे होश नहीं रहता और वह बेहोश हो जाती है। कई बार वह एक पैर पर खड़ी होकर आरती करती है और लंबे समय तक इसी अवस्था में रहती है। उसने यह भी कहा कि वह समाज सेवा करना चाहती है, लेकिन भगवान की भक्ति में डूब जाने के कारण उसका सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।
बिंम्बी कुमारी और उनकी बेटी के खाने में सास गायत्री देवी ने नशीली दवाइयां मिलाई थी जिससे बिंम्बी और उनकी बेटी के शरीर पर रिएक्शन हो गए थे उसे भी लड्डू गोपाल की कृपा से बिना किसी गोली दवाई के ठीक हो गए इतना ही नहीं देवर अरविंद और देवरानी योगिता यह लोग रहने नहीं देना चाहते हैं घर से भागना चाहते है
इस पूरे मामले ने इलाके में चर्चा का विषय बना दिया है। जहां कुछ लोग इसे आस्था और चमत्कार मान रहे हैं, वहीं कई लोग इसे मानसिक और चिकित्सकीय जांच का विषय भी बता रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ स्वास्थ्य पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल, बिम्बी कुमारी अपने अनुभवों को दिव्य आशीर्वाद मान रही हैं और खुद को लड्डू गोपाल की अनन्य भक्त बता रही हैं। मामला आस्था और विज्ञान के बीच संतुलन की बहस को एक बार फिर सामने लाता है।
